गुरुग्राम। पश्चिम एशिया में जारी Iran–Israel conflict का असर अब आईटी सेक्टर पर गंभीर रूप से दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और सुरक्षा हालात बिगड़ने के चलते 10,000 से अधिक भारतीय आईटी कंपनियां संकट में आ गई हैं, जबकि 5 लाख से ज्यादा आईटी पेशेवरों की नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब, United Arab Emirates, कतर, कुवैत, बहरीन, जॉर्डन, इराक और ओमान जैसे देशों में भारतीय आईटी कंपनियों की बड़ी मौजूदगी है। ये कंपनियां सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सपोर्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और ऑपरेशन जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं। लेकिन युद्ध के कारण इन क्षेत्रों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो बड़ी संख्या में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को वापस देश लौटना पड़ सकता है। अनुमान है कि यह संख्या 5 लाख के पार जा सकती है। इससे देश में रोजगार का दबाव अचानक बढ़ने की आशंका है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में लौटने वाले पेशेवरों के लिए तुरंत वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण होगा।
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विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति 1990 के Iraq–Kuwait war जैसी दिखाई दे रही है, जब इराक द्वारा कुवैत पर हमले के बाद लगभग एक लाख भारतीय पेशेवरों को खाड़ी देशों से लौटना पड़ा था। उस समय भी रोजगार और पुनर्वास बड़ी चुनौती बनकर सामने आया था।
गुरुग्राम स्थित साइबर सिटी पर भी इस संकट का असर साफ दिखाई दे रहा है। यहां खाड़ी देशों के लिए काम करने वाले करीब 250 कॉल सेंटर पिछले कई दिनों से प्रभावित हैं। इन कॉल सेंटरों में हजारों कर्मचारी काम करते हैं, जिनकी नौकरी पर अब अनिश्चितता का खतरा बढ़ गया है। हालांकि, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के लिए काम करने वाले कॉल सेंटर फिलहाल सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि खाड़ी देशों की सरकारों ने सुरक्षा कारणों से विदेशी कंपनियों को अस्थायी रूप से काम रोकने और सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते आईटी प्रोजेक्ट्स और सर्विस ऑपरेशन बाधित हो गए हैं। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती, तो कंपनियों को लंबे समय तक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर उन भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनका कारोबार पूरी तरह खाड़ी देशों पर निर्भर है। अगर जंग का दायरा और बढ़ता है, तो 10,000 से अधिक कंपनियों के बंद होने का खतरा भी जताया जा रहा है।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे भारत के आईटी सेक्टर की ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है। बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स रुकने और कॉन्ट्रैक्ट्स के प्रभावित होने से राजस्व में गिरावट आ सकती है।
फिलहाल, स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। अगर जल्द ही युद्धविराम या हालात में सुधार नहीं होता, तो इसका असर और गहरा हो सकता है। ऐसे में आईटी कंपनियां और कर्मचारी दोनों ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं, जहां भविष्य की दिशा पूरी तरह मौजूदा भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करती नजर आ रही है।
