मुंबई: मुंबई के मुलुंड इलाके में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ा एक बड़ा धोखाधड़ी मामला सामने आया है, जहां एक रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के नाम पर करीब ₹2.55 करोड़ की कथित हेराफेरी का खुलासा हुआ है। इस मामले में दो बिल्डरों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर अपने ही बिजनेस पार्टनर को धोखा देकर फ्लैट बिक्री की रकम हड़पने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पूरी साजिश सुनियोजित तरीके से रची गई थी, जिसमें दस्तावेजों को छिपाने और कैश ट्रांजैक्शन के जरिए रकम को गबन किया गया।
साझेदारी में बदलाव के बाद बढ़ा आरोपियों का नियंत्रण
जांच के अनुसार, यह मामला एक कंस्ट्रक्शन फर्म से जुड़ा है, जिसकी स्थापना वर्ष 2011 में साझेदारी के आधार पर की गई थी। शुरुआत में सभी पार्टनरों की हिस्सेदारी बराबर थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद परिस्थितियों का फायदा उठाकर साझेदारी की शर्तों में बदलाव किया गया, जिससे आरोपियों का नियंत्रण बढ़ गया। इसी बदलाव के बाद वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिला शुरू होने का संदेह जताया जा रहा है।
तीन फ्लैटों की बिक्री में ₹2.55 करोड़ की डील
मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान केशव उर्फ कमलेश दामजी मिनात और प्रेमजी वेलजी पटेल के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने मुलुंड पूर्व में चल रहे रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत तीन फ्लैट एक ही परिवार को बेचे। इन फ्लैट्स की कुल डील वैल्यू ₹2.55 करोड़ बताई गई, लेकिन कंपनी के आधिकारिक खाते में केवल ₹31.32 लाख ही जमा कराए गए। शेष राशि नकद रूप में लेकर उसे अपने पास रख लिया गया और इसकी जानकारी अन्य पार्टनरों को नहीं दी गई।
FCRF Academy Launches Premier Anti-Money Laundering Certification Program
दस्तावेजों को रिकॉर्ड से बाहर रखने का आरोप
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे लेन-देन को छिपाने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कंपनी के रिकॉर्ड में शामिल ही नहीं किया गया। इनमें बिक्री समझौते, भुगतान रसीदें और कब्जा पत्र जैसे अहम दस्तावेज शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि धोखाधड़ी को छिपाने के लिए जानबूझकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया।
इस धोखाधड़ी का खुलासा नवंबर 2025 में हुआ, जब प्रोजेक्ट साइट पर कुछ अज्ञात लोगों के प्रवेश की सूचना मिली। साइट सुपरवाइजर ने इसकी जानकारी दी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान फ्लैट्स की बिक्री और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी सामने आई, जिससे पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ।
फरवरी 2026 में शिकायत, दो आरोपी न्यायिक हिरासत में
इसके बाद फरवरी 2026 में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया और जांच आगे बढ़ाई गई। आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस पूरे प्रकरण में अन्य लोग भी शामिल थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में इस तरह के विवाद अक्सर पार्टनरशिप में पारदर्शिता की कमी और दस्तावेजी नियंत्रण के अभाव के कारण सामने आते हैं। कई बार कैश ट्रांजैक्शन और अनौपचारिक समझौतों के कारण धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे निवेशकों और पार्टनरों दोनों को नुकसान उठाना पड़ता है।
बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि फ्लैट खरीदने वाले परिवार को इस अनियमितता की जानकारी थी या नहीं। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि क्या इसी तरह के और सौदे किए गए, जिनमें कंपनी के आधिकारिक खातों से बाहर लेन-देन हुआ।
यह मामला एक बार फिर रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और नियमन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों और पार्टनरों को किसी भी प्रोजेक्ट में शामिल होने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच, भुगतान की पारदर्शी प्रक्रिया और कानूनी सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
