मुंबई में MGL बिल अपडेट के नाम पर 100 से अधिक लोगों से करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी हुई। APK फाइल के जरिए मोबाइल हैक कर बैंकिंग डेटा चुराया गया और 177 खातों से ₹31 करोड़ के लेन-देन सामने आए।

MGL बिल अपडेट के नाम पर साइबर जाल: 100 से ज्यादा लोग शिकार, ₹2.7 करोड़ की ठगी

Team The420
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मुंबई:  देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में साइबर ठगी का एक बड़ा और संगठित मामला सामने आया है, जहां महानगर गैस के बिल अपडेट के नाम पर 100 से अधिक लोगों को निशाना बनाकर करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी की गई। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि यह कोई साधारण ठगी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क था, जिसने फर्जी कॉल, डर पैदा करने वाले मैसेज और खतरनाक मोबाइल ऐप के जरिए लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ किया।

गैस कनेक्शन बंद होने का डर दिखाकर बनाया शिकार

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पिछले 30 दिनों के भीतर इस गिरोह ने बड़ी संख्या में गैस उपभोक्ताओं और नए कनेक्शन के आवेदकों को टारगेट किया। ठगों ने खुद को गैस कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क किया और उन्हें यह कहकर डराया कि यदि उनका बिल तुरंत अपडेट नहीं किया गया, तो उनका गैस कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा। इसी डर और जल्दबाजी का फायदा उठाकर लोगों को झांसे में लिया गया।

APK फाइल से मोबाइल पर कब्जा

मामले की सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि ठगों ने केवल कॉल या मैसेज तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि लोगों के मोबाइल फोन को पूरी तरह हैक करने की रणनीति अपनाई। पीड़ितों को एक लिंक भेजा गया, जिस पर क्लिक करते ही एक APK फाइल डाउनलोड हो जाती थी। जैसे ही यह फाइल इंस्टॉल की जाती, फोन का पूरा नियंत्रण साइबर अपराधियों के हाथ में चला जाता था।

इसके बाद ठगों को पीड़ितों के बैंकिंग डिटेल, ओटीपी, मैसेज और अन्य संवेदनशील जानकारी तक सीधी पहुंच मिल जाती थी। इसी एक्सेस के जरिए कुछ ही मिनटों में खातों से पैसे निकाल लिए जाते थे। कई मामलों में पीड़ितों को तब तक ठगी का पता नहीं चला, जब तक उनके खाते लगभग खाली नहीं हो गए।

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177 बैंक खातों से ₹31 करोड़ का लेन-देन

जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क ने 177 फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया, जिनके जरिए करीब ₹31 करोड़ के लेन-देन को अंजाम दिया गया। इससे संकेत मिलता है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और बड़े स्तर पर साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था।

सोशल इंजीनियरिंग बनी ठगी का बड़ा हथियार

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की ठगी पूरी तरह “सोशल इंजीनियरिंग” पर आधारित होती है। प्रसिद्ध साइबर क्राइम एक्सपर्ट और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, “साइबर अपराधी अब तकनीक से ज्यादा लोगों की मानसिकता को निशाना बना रहे हैं। डर, दबाव और तत्काल कार्रवाई की भावना पैदा करके वे लोगों को बिना सोचे-समझे निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं, जिससे वे आसानी से जाल में फंस जाते हैं।”

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सबसे बड़ा खतरा अनजान ऐप डाउनलोड करने से होता है। ठग अक्सर इन ऐप्स को बिल अपडेट, पेमेंट वेरिफिकेशन या सर्विस एक्टिवेशन के नाम पर पेश करते हैं, जबकि असल में ये स्पाइवेयर होते हैं। ये यूजर की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं और जरूरी डेटा चुरा लेते हैं।

मास्टरमाइंड की तलाश, दूसरे शहरों में नेटवर्क की जांच

मुंबई में हालात इतने गंभीर रहे कि एक ही दिन में कई लोग इस ठगी का शिकार बने। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड और उससे जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या देश के अन्य शहरों में भी इसी तरह का नेटवर्क सक्रिय है।

साइबर सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की ठगी आने वाले समय में और बढ़ सकती है, क्योंकि डिजिटल सेवाओं पर निर्भरता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आम लोगों को खुद भी सतर्क रहने की जरूरत है।

अधिकारियों ने दी सतर्क रहने की सलाह

अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें, खासकर जब उसमें डर या दबाव पैदा करने की कोशिश की जा रही हो। केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत चैनल के जरिए ही किसी भी बिल या सेवा की पुष्टि करें। इसके अलावा, मोबाइल में “Unknown Sources” से ऐप डाउनलोड करने का विकल्प बंद रखें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।

अगर कोई व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय पर की गई कार्रवाई से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि डिजिटल युग में सुविधा के साथ जोखिम भी बढ़ रहा है, और सतर्कता ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।

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