रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला की शिकायत के बाद एक वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 2003 बैच के अधिकारी रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कदम महिला द्वारा लगाए गए शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों तथा वित्तीय अनियमितताओं के दावों के बाद उठाया गया है।
सरकारी आदेश के अनुसार, प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि अधिकारी ने सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया है। आरोपों में पद के अनुरूप व्यवहार न करना, नैतिक मानकों का उल्लंघन, आधिकारिक प्रभाव का दुरुपयोग और स्थापित प्रक्रियाओं से विचलन जैसी गंभीर बातें शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार का आचरण न केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी का विषय है, बल्कि इससे पूरे पुलिस विभाग की छवि पर भी असर पड़ता है।
निलंबन आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित घटनाओं से जुड़े आरोप सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए, जिससे विभाग की साख प्रभावित हुई। इसी आधार पर सरकार ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
विभागीय जांच के आदेश, मुख्यालय से बाहर जाने पर रोक
सरकार ने मामले में विस्तृत विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं, जिसमें तथ्यों की गहन पड़ताल कर जिम्मेदारी तय की जाएगी। निलंबन अवधि के दौरान अधिकारी को नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में ही उपस्थित रहना होगा और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की इजाजत नहीं होगी।
नियमों के तहत, निलंबन के दौरान अधिकारी को जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) मिलता रहेगा, लेकिन उनकी प्रशासनिक शक्तियां सीमित रहेंगी। यह कार्रवाई अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के प्रावधानों के तहत की गई है।
महिला की शिकायत से शुरू हुआ मामला
यह पूरा मामला पिछले वर्ष 15 अक्टूबर को दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता महिला, जो एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी बताई जा रही है, ने अधिकारी पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।
शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित की गई, जिसने प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की। इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने निलंबन का निर्णय लिया।
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अधिकारी ने आरोपों को बताया निराधार, ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया
दूसरी ओर, रतन लाल डांगी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह आरोप निराधार हैं और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं। उन्होंने संबंधित महिला के खिलाफ ब्लैकमेलिंग की शिकायत भी दर्ज कराई है।
दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के चलते मामला और जटिल हो गया है। ऐसे में विभागीय जांच की रिपोर्ट इस पूरे प्रकरण में अहम भूमिका निभाएगी और तथ्यों को स्पष्ट करेगी।
अनुशासन और जवाबदेही पर सख्त संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई प्रशासन की ओर से एक स्पष्ट संदेश है कि सेवा आचरण और नैतिक मानकों के उल्लंघन को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासकर वरिष्ठ अधिकारियों के मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर सरकार का रुख सख्त होता दिख रहा है।
कुल मिलाकर, यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, महिला सुरक्षा और संस्थागत अनुशासन जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में विभागीय जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
