हैदराबाद। पुराने ₹1 के नोट के बदले लाखों रुपये मिलने का झांसा देकर हैदराबाद के कुतबिगुड़ा निवासी 49 वर्षीय निजी कर्मचारी से करीब ₹8 लाख की कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर साइबर अपराध पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि ठगों ने सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर पुराने नोट की कीमत ₹45 लाख बताई और बाद में रकम जारी करने के नाम पर अलग-अलग शुल्क के रूप में पैसे जमा कराए।
पीड़ित के मुताबिक, 20 सितंबर को उसने सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन देखा था। विज्ञापन में दावा किया गया था कि पुराना भारतीय ₹1 का नोट बेचने पर उसे ₹45 लाख तक मिल सकते हैं। इस प्रस्ताव पर भरोसा करते हुए पीड़ित ने विज्ञापन में दिए गए संपर्क नंबर पर बातचीत की। उससे पुराने नोट की तस्वीर के साथ अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को कहा गया। पीड़ित ने मांगी गई जानकारी और नोट की तस्वीर भेज दी।
इसके बाद कथित ठगों ने उसे अलग-अलग भुगतान करने के लिए कहा। पीड़ित को बताया गया कि नोट की बिक्री से मिलने वाली बड़ी रकम जारी करने के लिए पहले कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसके नाम पर उससे रिलीज फीस, टैक्स और RBI क्लीयरेंस समेत अलग-अलग मदों में पैसे जमा कराने को कहा गया। शुरुआत में रकम अपेक्षाकृत कम बताई गई, लेकिन भुगतान शुरू होने के बाद ठग लगातार नए शुल्क जोड़ते गए।
मामले में ठगी का दूसरा चरण तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने खुद को आंध्र प्रदेश साइबर अपराध पुलिस का DSP बताया। कथित DSP ने पीड़ित से संपर्क किया और उस पर काले धन की बिक्री में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके बाद उसे कानूनी कार्रवाई शुरू करने की धमकी दी गई। घबराए पीड़ित को कथित अधिकारी के निर्देशों का पालन करने और मांगी गई रकम जमा करने के लिए कहा गया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पुलिस शिकायत के अनुसार, 20 से 23 सितंबर के बीच पीड़ित ने अलग-अलग लेनदेन में कुल ₹7.9 लाख से अधिक की रकम आरोपियों को ट्रांसफर कर दी। हर भुगतान के बाद उससे और पैसे मांगे जाते रहे। जब लगातार अतिरिक्त रकम की मांग होने लगी तो पीड़ित को संदेह हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। इसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
साइबर अपराध पुलिस ने शुक्रवार को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया। आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के साथ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। धारा 66C पहचान संबंधी जानकारी के दुरुपयोग और धारा 66D कंप्यूटर या संचार माध्यम के जरिए प्रतिरूपण कर धोखाधड़ी से संबंधित है।
जांच में पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों की जानकारी जुटा रही है, जिनके जरिए पीड़ित से संपर्क किया गया और रकम मंगाई गई। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सोशल मीडिया पर विज्ञापन किसने जारी किया था और पुराने नोट की कथित खरीद के नाम पर बनाई गई पूरी ठगी की व्यवस्था में कितने लोग शामिल हैं।
यह मामला ऐसे साइबर ठगी के तरीकों की ओर भी इशारा करता है, जिनमें लोगों को पुराने सिक्कों या नोटों की असामान्य कीमत मिलने का लालच दिया जाता है। पहले भरोसा हासिल करने के बाद पंजीकरण, कर, सत्यापन, क्लीयरेंस या अन्य शुल्क के नाम पर रकम मांगी जाती है। कई मामलों में ठग खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ित पर दबाव भी बनाते हैं। इस मामले में भी पुराने ₹1 के नोट के बदले ₹45 लाख मिलने का लालच देने के बाद कथित तौर पर डर और शुल्क की अलग-अलग वजहों का इस्तेमाल कर पैसे वसूले गए। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही ठगी के पूरे नेटवर्क और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
