हैदराबाद में ₹64.5 करोड़ के कथित फर्जी ITC घोटाले में ऊर्जा कंपनी के MD को गिरफ्तार किया गया है।

₹64.5 करोड़ फर्जी ITC घोटाला: ऊर्जा कंपनी का MD गिरफ्तार, GST जांच में शेल कंपनियों और फर्जी बिलिंग नेटवर्क का खुलासा

Team The420
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हैदराबाद: वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग ने कथित ₹64.5 करोड़ के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी इकोरेन एनर्जी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक लक्ष्मी प्रसाद येरनेनी (56) को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का आरोप है कि कंपनी ने बिना वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति के फर्जी टैक्स चालानों के आधार पर करोड़ों रुपये का ITC हासिल किया और उसका उपयोग कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया।

GST अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि कथित घोटाला कई कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया गया, जहां फर्जी लेनदेन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क का उद्देश्य कागजों पर वैध कारोबारी गतिविधि का आभास पैदा करना और टैक्स प्रणाली का दुरुपयोग करना था।

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अधिकारियों ने बताया कि येरनेनी को शुक्रवार तड़के गिरफ्तार किया गया। बाद में उन्हें हैदराबाद स्थित आर्थिक अपराध न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 7 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद उन्हें 14 दिनों के लिए चंचलगुडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम की धारा 132(1)(c) और 132(1)(i) सहित राज्य GST कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। चूंकि कथित कर चोरी की राशि ₹5 करोड़ से अधिक है, इसलिए यह अपराध संज्ञेय (Cognisable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) श्रेणी में आता है।

जांच के दौरान दर्ज किए गए बयान में येरनेनी ने कथित रूप से स्वीकार किया कि कंपनी में विक्रेताओं (वेंडर्स) को सूचीबद्ध करने, कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) और खरीद आदेश (परचेज ऑर्डर) जारी करने तथा अग्रिम भुगतान को अंतिम मंजूरी देने का अधिकार उनके पास था। अधिकारियों का आरोप है कि इसी अधिकार का उपयोग करते हुए फर्जी चालानों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया, जबकि वास्तविक आपूर्ति का कोई प्रमाण नहीं मिला।

जांचकर्ताओं का कहना है कि कथित धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए कई कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से इस तरह स्थानांतरित किया गया कि लेनदेन सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों जैसा दिखाई दे। वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में अनेक खातों के जरिए रकम के आवागमन के संकेत मिले हैं, जिनका अब विस्तार से विश्लेषण किया जा रहा है।

GST विभाग का मानना है कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं हो सकता। जांच एजेंसियां अब उन सभी संस्थाओं, आपूर्तिकर्ताओं और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं जो कथित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज, कर रिटर्न और चालानों की फोरेंसिक जांच भी की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी ITC के जरिए सरकारी खजाने को वास्तविक नुकसान कितना पहुंचा।

कर विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के मामले देशभर में GST प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर शेल कंपनियां, फर्जी बिलिंग, कागजी लेनदेन और धन की कई स्तरों पर आवाजाही का सहारा लेकर कर चोरी की जाती है। हाल के वर्षों में विभाग ने डेटा एनालिटिक्स, ई-इनवॉयसिंग, बैंकिंग ट्रेल और डिजिटल ऑडिट के माध्यम से ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई तेज की है।

फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला की पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों, कंपनियों या सहयोगियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य कथित फर्जी ITC नेटवर्क के पूरे ढांचे का खुलासा करना और कर चोरी से जुड़े सभी जिम्मेदार पक्षों को कानून के दायरे में लाना है।

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