पुलिस कर रही वित्तीय रिकॉर्ड की जांच; 70 से अधिक लोगों से बड़ी रकम जुटाने का दावा, विदेश भागने की अटकलों की पुष्टि नहीं

₹50 करोड़ की कथित चिटफंड धोखाधड़ी में दंपती गिरफ्तार, निवेशकों से धन जुटाकर फरार होने का आरोप

Roopa
By Roopa
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हैदराबाद (तेलंगाना): हैदराबाद में कथित ₹50 करोड़ की चिटफंड और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में विशेष अभियान दल (Special Operations Team–SOT) ने एक दंपती को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, पब्बा चंद्रशेखर (51) और उनकी पत्नी स्वप्ना (42) पर निवेशकों से बड़ी धनराशि एकत्र कर फरार होने का आरोप है। मामले में दर्ज शिकायतों के आधार पर जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।

पुलिस के अनुसार, चंद्रशेखर पिछले लगभग 30 वर्षों से श्री वेंकटेश्वर मार्केटिंग नामक सीमेंट फाइनेंस और चिटफंड व्यवसाय संचालित कर रहे थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने विभिन्न व्यक्तिगत कारणों, जिनमें बेटी की शादी और परिवार की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी शामिल थीं, का हवाला देकर लोगों से बड़ी मात्रा में धन उधार लिया।

जांच के अनुसार, दंपती 22 जून को अपने घर से निकले थे और 8 जुलाई के बाद उनसे किसी प्रकार का संपर्क नहीं हो पाया। इस बीच ऐसी चर्चाएं भी सामने आईं कि वे स्विट्जरलैंड भाग गए हैं। हालांकि, कुशाईगुड़ा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है जिससे यह पुष्टि हो सके कि दोनों देश छोड़कर विदेश गए थे।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि दंपती ने 70 से अधिक लोगों से लगभग ₹50 करोड़ की धनराशि एकत्र की और बाद में संपर्क समाप्त कर दिया। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

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जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि निवेशकों से प्राप्त धनराशि का उपयोग कहां किया गया, क्या उसे अन्य खातों या संपत्तियों में स्थानांतरित किया गया और क्या इस कथित वित्तीय नेटवर्क में अन्य व्यक्तियों की भी भूमिका थी। बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय धोखाधड़ी और चिटफंड से जुड़े मामलों में बैंकिंग रिकॉर्ड, निवेश दस्तावेज, डिजिटल लेनदेन और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। हालांकि, केवल गिरफ्तारी या पुलिस के आरोपों से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अंतिम निर्णय न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर करेगा।

पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त वित्तीय अनियमितताएं, अन्य पीड़ित या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच एजेंसियां कथित धोखाधड़ी से जुड़े पूरे वित्तीय लेनदेन और निवेश नेटवर्क की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं।

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