पंचकुला। हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के वित्त निदेशक अमित देवान को एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार कर लिया है। यह इस मामले में अब तक की पंद्रहवीं गिरफ्तारी है। जांच अधिकारियों ने अदालत को बताया कि देवान को बुधवार को गिरफ्तार किया गया, जब उनके खिलाफ ठोस साक्ष्य सामने आए।
अदालत में पेश किए जाने पर देवान को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि देवान के कार्यकाल के दौरान दो खाते—IDFC First Bank, सेक्टर 32, चंडीगढ़ और AU Small Finance Bank में—खुलवाए गए थे। एसीबी का आरोप है कि सरकारी प्रावधानों की जानबूझकर अनदेखी करते हुए इन खातों के माध्यम से वित्तीय लेनदेन किए गए, जिसका उद्देश्य निजी लाभ प्राप्त करना था।
जांच एजेंसी ने बताया कि देवान कथित रूप से मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के साथ मिलीभगत में शामिल थे और अपराध के निष्पादन में सक्रिय रूप से सहायता प्रदान कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने भारी अवैध लाभ (illegal gratification) स्वीकार किया, जिसे जब्त किए गए दस्तावेज़ और गवाहों के बयानों से सिद्ध किया गया है। जांच के दौरान संबंधित बैंकों और विभागों से आवश्यक दस्तावेज़ भी प्राप्त किए गए हैं।
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एसीबी ने अदालत में यह भी कहा कि अमित देवान को विभिन्न महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों और उनके द्वारा और अन्य लोगों द्वारा हस्ताक्षरित इंस्ट्रूमेंट्स के संबंध में सामने लाया जाना आवश्यक है। यह पूछताछ इसलिए जरूरी है ताकि अपराध से प्राप्त राशि की वसूली की जा सके और मामले में और सह-आरोपियों की पहचान की जा सके।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला सरकारी फंड की कथित गबन और धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें फर्जी इंस्ट्रक्शन मेमो, डेबिट नोट और अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। अदालत में पेश किए गए आवेदन में कहा गया कि गहन हिरासत में पूछताछ अपराध के तरीकों, सह-आरोपियों की भूमिकाओं और संबंधित धन की ट्रेसिंग के लिए जरूरी है।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को विभिन्न फर्मों और कंपनियों में क्रेडिट और डेबिट लेनदेन से संबंधित प्रविष्टियों के संबंध में भी सामने लाया जाएगा। इसका उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना और आरोपित द्वारा किए गए अवैध लेनदेन के पूरे चक्र को उजागर करना है।
जांच में यह भी सामने आया कि देवान ने कथित रूप से जेवरात व्यापारी राजन सिंह के साथ भी सहयोग किया, हालांकि अदालत ने अतिरिक्त रिमांड के लिए उनकी याचिका को खारिज कर दिया। एसीबी ने बताया कि महत्वपूर्ण साक्ष्य—जैसे चल और अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण—अभी बरामद होने बाकी हैं और हिरासत में पूछताछ के दौरान इनके मिलने की संभावना है।
मामले में एसीबी का कहना है कि हिरासत में पूछताछ से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस प्रकार सरकारी फंड का गबन किया गया, कौन-कौन शामिल था और अवैध धन की निकासी किस तरह की गई। आरोपी के खिलाफ जब्त किए गए दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक सबूत इस बात का आधार प्रदान करते हैं कि जांच एजेंसी इस घोटाले में हर स्तर पर गहन पड़ताल कर रही है।
इस मामले में आगे की जांच में यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन-से अधिकारी और निजी व्यक्ति लाभार्थी थे, और उनके द्वारा अपनाए गए वित्तीय मार्ग क्या थे। एसीबी ने अदालत से कहा कि हिरासत में पूछताछ आवश्यक है ताकि अपराध से संबंधित सभी पहलुओं का खुलासा किया जा सके और फर्जी दस्तावेज़ों और वित्तीय उपकरणों की रिकवरी की जा सके।
