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होटल में आधार कार्ड की कॉपी देना पड़ सकता है भारी, साइबर ठग बना सकते हैं निशाना: FCRF की चेतावनी

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: होटल में चेक-इन के दौरान आधार कार्ड की फोटोकॉपी देना आपकी निजी जानकारी को साइबर अपराधियों तक पहुंचा सकता है और आपको वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बना सकता है। Future Crime Research Foundation (FCRF) ने यात्रियों और ट्रैवल एजेंटों को आगाह करते हुए कहा है कि सामान्य लगने वाली यह प्रक्रिया कई मामलों में साइबर अपराधियों के लिए संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने का माध्यम बन जाती है। FCRF ने सलाह दी है कि होटलों में पहचान के लिए आधार की सामान्य प्रति देने के बजाय अन्य वैध पहचान पत्र या “मास्क्ड आधार” का उपयोग किया जाए।

FCRF के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश लोग बिना सोचे-समझे होटल में चेक-इन के समय आधार कार्ड की कॉपी जमा कर देते हैं, जबकि यह पूरी तरह सुरक्षित तरीका नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों ने बताया कि आधार संबंधी जानकारी मांगने का अधिकार केवल कुछ अधिकृत संस्थाओं को होता है और सामान्य परिस्थितियों में होटल उन संस्थाओं की श्रेणी में शामिल नहीं हैं।

FCRF के अनुसार, कई मामलों में साइबर अपराधियों ने होटल और आतिथ्य क्षेत्र से प्राप्त व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बनाया है। ऐसी जानकारी का उपयोग फर्जी पहचान तैयार करने, सोशल इंजीनियरिंग हमलों, बैंकिंग धोखाधड़ी, फिशिंग और अन्य साइबर अपराधों में किया जा सकता है। इसी कारण यात्रियों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों ने “मास्क्ड आधार” के उपयोग पर विशेष जोर दिया। मास्क्ड आधार भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी आधार कार्ड का ऐसा संस्करण है जिसमें 12 अंकों वाले आधार नंबर के पहले आठ अंक छिपे रहते हैं और केवल अंतिम चार अंक दिखाई देते हैं। इससे पहचान सत्यापन भी संभव रहता है और पूरा आधार नंबर सार्वजनिक होने का जोखिम भी कम हो जाता है। इसे UIDAI के आधिकारिक पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है।

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FCRF ने यात्रियों को सोशल मीडिया के उपयोग में भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। छुट्टियों के दौरान यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक रूप से साझा करने से साइबर अपराधियों को व्यक्तिगत जानकारी जुटाने का अवसर मिल सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों के माध्यम से तस्वीरों और वीडियो में छेड़छाड़ कर लोगों को ब्लैकमेल करने, फर्जी सामग्री तैयार करने या उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ गया है। इसलिए सोशल मीडिया प्रोफाइल को निजी रखना, केवल विश्वसनीय लोगों के साथ सामग्री साझा करना और अज्ञात व्यक्तियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करना बेहतर सुरक्षा उपाय माना गया है।

FCRF ने ऑनलाइन होटल बुकिंग के दौरान भी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, छुट्टियों और त्योहारों के मौसम में होटल बुकिंग से जुड़ी साइबर ठगी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। साइबर अपराधी आकर्षक छूट, फर्जी वेबसाइट, नकली भुगतान लिंक और बनावटी ऑफर के माध्यम से लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। इसलिए किसी भी होटल की बुकिंग करने से पहले उसकी वेबसाइट, संपर्क विवरण, भुगतान व्यवस्था और सेवा प्रदाता की विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है।

डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए FCRF ने कुछ निःशुल्क साइबर सुरक्षा उपकरणों के उपयोग की भी सलाह दी। इनमें संदिग्ध फाइल, लिंक, डोमेन और आईपी एड्रेस की जांच करने वाला VirusTotal तथा एंड्रॉयड उपकरणों को मैलवेयर, डेटा चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए विकसित M-Kavach जैसे सुरक्षा समाधान शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सतर्कता, सीमित व्यक्तिगत जानकारी साझा करना और केवल विश्वसनीय प्लेटफॉर्म का उपयोग करना ही आज के समय में साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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