फर्जी नियुक्ति और जॉइनिंग लेटर देकर अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन प्लांट में जीएम बनाने का आरोप; शिकायतकर्ता ने मकान का हिस्सा बेचकर जुटाई थी रकम, 32.90 लाख रुपये अब भी बकाया

मेडिकल कॉलेज में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 40 लाख की ठगी, दो के खिलाफ FIR

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By Roopa
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हिसार। महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी), अग्रोहा में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 40 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध शाखा की जांच के बाद पुलिस ने श्यामसुंदर और राजविंदर कौर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पटेल नगर की 8 मरला कॉलोनी निवासी परवीन कुमार ने आरोप लगाया है कि दोनों ने केंद्र सरकार में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे रकम ली और बाद में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र देकर उन्हें अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में तैनात कर दिया।

पुलिस के अनुसार, परवीन ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत देकर बताया कि अगस्त 2025 में उनके दोस्त दीपक ने उनकी मुलाकात राजविंदर कौर और श्यामसुंदर से कराई थी। आरोपियों ने उन्हें केंद्र सरकार में सीआरएम पद पर नौकरी दिलाने की बात कही और इसके लिए 40 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता के मुताबिक, नौकरी की उम्मीद में उन्होंने मकान का कुछ हिस्सा बेचकर रकम जुटाई।

परवीन का आरोप है कि अक्तूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच उन्होंने श्यामसुंदर के बैंक खाते में कुल 33.70 लाख रुपये जमा किए। इसके अलावा 6.30 लाख रुपये नकद दिए गए। इस तरह आरोपियों को कुल 40 लाख रुपये दिए गए। रकम लेने के बाद राजविंदर कौर ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नाम से कथित नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराया।

फर्जी नियुक्ति पत्र के आधार पर मेडिकल कॉलेज में तैनाती

शिकायत के मुताबिक, कथित फर्जी नियुक्ति पत्र के आधार पर परवीन को महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा के ऑक्सीजन प्लांट में महाप्रबंधक के पद पर तैनात किया गया। उन्होंने फरवरी 2026 के अंत तक वहां काम भी किया। हालांकि, उन्हें वेतन नहीं मिला। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने पर उन्हें नियुक्ति और नौकरी को लेकर संदेह हुआ।

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इसके बाद परवीन ने आरोपियों से अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। शिकायतकर्ता के अनुसार, श्यामसुंदर ने मार्च से जून 2026 के बीच उन्हें 7.10 लाख रुपये वापस किए। इसके बावजूद 32.90 लाख रुपये अब भी वापस नहीं किए गए हैं। परवीन ने पुलिस से शेष रकम बरामद कराने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

आर्थिक अपराध शाखा की जांच के बाद मामला दर्ज

परवीन ने शुरुआत में अनाज मंडी पुलिस चौकी में शिकायत दी थी। उनका आरोप है कि वहां शिकायत से संबंधित साक्ष्य लेने से इनकार किया गया। इसके बाद मामला आर्थिक अपराध शाखा को भेजा गया। शाखा ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की।

जांच के दौरान श्यामसुंदर और राजविंदर कौर की कथित भूमिका सामने आने के बाद दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस अब रकम के लेन-देन, कथित नियुक्ति पत्र और आरोपियों द्वारा शिकायतकर्ता को नौकरी दिलाने के लिए किए गए दावों की जांच कर रही है।

पुलिस के सामने अब यह भी पता लगाने की चुनौती है कि कथित फर्जी नियुक्ति पत्र कहां तैयार किया गया और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे। जांच में बैंक खातों में हुए लेन-देन और नौकरी से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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