करिमनगर में उजागर ₹138 करोड़ के म्यूल अकाउंट सिंडिकेट ने दिखाया कि शेल कंपनियां, सिम कंट्रोल और OTP एक्सेस साइबर अपराध का नया हथियार बन चुके हैं।

डिजिटल धोखाधड़ी का आंकड़ा चौंकाने वाला: हिमाचल में तीन साल में ₹1.5 अरब का फ्रॉड

Roopa
By Roopa
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में बीते तीन वर्षों में साइबर ठगी ने गंभीर रूप ले लिया है। प्रदेश में कुल 585 मामले दर्ज किए गए, जिनमें अपराधियों ने लगभग ₹1.50 अरब की धोखाधड़ी की। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार 258 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और लगभग ₹10.25 करोड़ की रकम बरामद हुई। डिजिटल फ्रॉड के सबसे अधिक मामले कांगड़ा जिले में दर्ज हुए, जहां अकेले 59 शिकायतें आईं।

शनिवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बदलते डिजिटल माहौल में गंभीर चुनौती बन गया है और इसके खिलाफ राज्य सरकार सतर्क है।

डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रदेश के 146 पुलिस थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा आठ अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 29 अधिकारियों को प्रशिक्षण जारी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दर्ज मामलों की संख्या ही 585 है, लेकिन कई लोग शिकायत दर्ज नहीं कराते। जिलेवार आंकड़ों के अनुसार: बद्दी में 58, सोलन में 41, मंडी में 30, किन्नौर में 28, सिरमौर में 25, शिमला में 17, ऊना में 13, नूरपुर में 12, चंबा और कुल्लू में 10-10, देहरा में 8, हमीरपुर में 7 और लाहौल-स्पीति में 4 मामले दर्ज हुए। बिलासपुर में सिर्फ एक मामला दर्ज किया गया।

तीन प्रमुख साइबर क्राइम पुलिस थानों—मंडी, धर्मशाला और शिमला—में कुल 262 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें साइबर पुलिस थाना मंडी में 100, धर्मशाला और शिमला में 81-81 मामले दर्ज किए गए। कुछ मामलों में बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत या लापरवाही भी सामने आई। ऐसे मामलों में चार बैंक कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया।

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ठगी की रकम के मामले में साइबर पुलिस थाना शिमला सबसे आगे है, जहां कुल ₹55 करोड़ 62 लाख 12 हजार 20 की धोखाधड़ी हुई। साइबर पुलिस थाना मंडी में ₹33 करोड़ 64 लाख 32 हजार 848, धर्मशाला में ₹25 करोड़ 91 लाख 98 हजार 466 की ठगी सामने आई।

अन्य जिलों में ठगी की राशि इस प्रकार रही: चंबा ₹12 करोड़ 95 लाख 86 हजार 902, सोलन ₹4 करोड़ 90 लाख 95 हजार 219, बद्दी ₹3 करोड़ 68 लाख 94 हजार 122, कांगड़ा ₹2 करोड़ 60 लाख 16 हजार 406, सिरमौर ₹2 करोड़ 30 लाख 9 हजार 634, मंडी ₹2 करोड़ 28 लाख 26 हजार 271**, जबकि बिलासपुर में सबसे कम ₹14 लाख 90 हजार की ठगी हुई।

गिरफ्तारियों के जिलेवार आंकड़े: चंबा 15, कांगड़ा 28, लाहौल-स्पीति 4, मंडी 2, सोलन 20, सिरमौर 24, किन्नौर 19, बद्दी 29, नूरपुर 1, शिमला 11, मंडी साइबर पुलिस थाना 49, धर्मशाला 55।

साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh का कहना है, “साइबर अपराधी लगातार नए तरीके खोज रहे हैं। सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी ऐप्स और फिशिंग लिंक से बड़े पैमाने पर लोगों को ठगा जा रहा है। प्रदेश में पुलिस की सतर्कता और डिजिटल जागरूकता को बढ़ाना जरूरी है।”

मुख्यमंत्री ने विधानसभा को बताया कि सरकार डिजिटल फ्रॉड से बचाव के लिए ऑनलाइन जागरूकता अभियान चला रही है। बैंक और वित्तीय संस्थानों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे लेनदेन के दौरान अधिक सावधानी बरतें।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर फ्रॉड के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन में तेज वृद्धि है। नागरिकों को किसी भी अनजान लिंक, एप या कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच करनी चाहिए।

राज्य में साइबर हेल्प डेस्क, प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी और जागरूकता अभियान मिलकर डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार की ठोस पहल साबित हो सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकों की सतर्कता और बैंकिंग सुरक्षा उपाय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

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