अमेरिका में H-1B वीज़ा नियमों को सख्त करने वाले नए बिल से भारतीय प्रोफेशनल्स की चिंता बढ़ी है। प्रस्ताव में $200,000 वेतन शर्त, वीज़ा कोटा कटौती, परिवार प्रतिबंध और OPT खत्म करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।

अमेरिका में H-1B वीज़ा सिस्टम पर सख्ती का प्रस्ताव, भारतीय प्रोफेशनल्स पर गहराया संकट

Team The420
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वाशिंगटन डी.सी: अमेरिका में H-1B वीज़ा प्रणाली को लेकर एक नया विधेयक सामने आने के बाद राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बड़ी बहस शुरू हो गई है। “End H-1B Visa Abuse Act of 2026” नामक इस प्रस्तावित बिल में वीज़ा नियमों को बेहद सख्त बनाने की बात कही गई है, जिसमें $200,000 की न्यूनतम वेतन शर्त, वीज़ा कोटा में भारी कटौती और परिवार साथ लाने पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान शामिल हैं।

भारतीय पेशेवरों पर सबसे बड़ा असर संभव

H-1B वीज़ा अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कुशल पेशेवरों को आईटी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में नौकरी देने की अनुमति देता है। इस प्रोग्राम में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी काफी अधिक है, जिसके चलते प्रस्तावित बदलावों का सबसे बड़ा असर भारत के टेक वर्कफोर्स पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

प्रस्तावित बिल के अनुसार, हर साल जारी होने वाले H-1B वीज़ा की संख्या को मौजूदा 65,000 से घटाकर 25,000 करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही तीन वर्षों के लिए नए वीज़ा जारी करने पर अस्थायी रोक लगाने की बात भी शामिल है, जिससे नए आवेदनों की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।

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$200,000 वेतन शर्त पर सबसे तीखी बहस

सबसे विवादास्पद प्रावधानों में $200,000 की न्यूनतम सालाना सैलरी शर्त शामिल है। इस नियम के लागू होने पर केवल उच्च वेतन वाली वरिष्ठ पदों की नौकरियां ही H-1B के तहत आ पाएंगी, जबकि मिड-लेवल इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और अन्य तकनीकी प्रोफेशनल्स के अवसर सीमित हो सकते हैं।

इसके अलावा मौजूदा लॉटरी सिस्टम को खत्म कर वेतन आधारित चयन प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है। इस नए मॉडल में अधिक सैलरी ऑफर करने वाली कंपनियों और आवेदनों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी।

परिवार साथ लाने पर प्रतिबंध का प्रस्ताव

बिल में यह भी प्रस्ताव है कि H-1B वीज़ा धारकों को अपने परिवार (पति/पत्नी और बच्चों) को अमेरिका लाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रावधान लंबे समय तक अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा नकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है।

प्रस्ताव में रोजगार नियमों को और सख्त करने की भी बात कही गई है। वीज़ा धारकों को एक से अधिक नौकरी करने की अनुमति नहीं होगी और कंपनियों को यह साबित करना होगा कि संबंधित पद के लिए कोई योग्य अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं है। साथ ही, हाल ही में छंटनी करने वाली कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने पर अतिरिक्त रोक लगाने का भी सुझाव दिया गया है।

OPT और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर भी असर

इसी तरह अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े OPT (Optional Practical Training) प्रोग्राम को खत्म करने की बात भी सामने आई है, जिससे विदेशी छात्रों को पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही H-1B से ग्रीन कार्ड में परिवर्तन की प्रक्रिया को भी कठिन बनाने का प्रस्ताव है।

समर्थकों का कहना है कि यह बिल अमेरिकी नागरिकों के रोजगार की रक्षा के लिए जरूरी है और कंपनियों द्वारा सस्ते विदेशी श्रमिकों के उपयोग पर रोक लगाएगा। उनका दावा है कि इससे घरेलू रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सिस्टम का दुरुपयोग रुकेगा।

टेक इंडस्ट्री ने प्रतिभा संकट की आशंका जताई

वहीं दूसरी ओर, टेक इंडस्ट्री और ग्लोबल कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में पहले से ही स्किल्ड टैलेंट की कमी है, और यह बदलाव स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं।

शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय छात्र संगठनों ने भी OPT प्रोग्राम खत्म करने के प्रस्ताव का विरोध किया है, क्योंकि यह विदेशी छात्रों के करियर अवसरों को प्रभावित करेगा।

कानून बनने से पहले लंबी राजनीतिक प्रक्रिया बाकी

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बिल कानून बनता है तो अमेरिका की स्किल्ड इमिग्रेशन प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। खासकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में नौकरी के अवसर कम हो सकते हैं और स्थायी निवास की प्रक्रिया और कठिन हो सकती है।

फिलहाल यह प्रस्ताव केवल विधेयक के रूप में पेश किया गया है और इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति की आवश्यकता होगी। तब तक इस मुद्दे पर बहस और राजनीतिक चर्चा जारी रहने की संभावना है।

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