बेंगलुरु में म्यसूरु के रेस्टोरेंट कारोबारी से 53 एकड़ जमीन डील के नाम पर ₹3 करोड़ से अधिक की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने खुद को वरिष्ठ कॉर्पोरेट अधिकारी बताकर भरोसा जीता।

मैसुर रेस्टोरेंट कारोबारी से ₹3 करोड़ की ठगी: ‘इंफोसिस अधिकारी’ बनकर जमीन डील के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा

Team The420
5 Min Read

बेंगलुरु:   कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में जमीन सौदों के नाम पर एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें एक म्यसूरु के रेस्टोरेंट कारोबारी से कथित तौर पर ₹3 करोड़ से अधिक की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने खुद को एक बड़ी आईटी कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बताकर 53 एकड़ जमीन की डील में निवेश का झांसा दिया और धीरे-धीरे करोड़ों रुपये की रकम विभिन्न खातों और माध्यमों से हड़प ली।

परिचित के जरिए हुई मुलाकात, कॉर्पोरेट पद का दिया झांसा

शिकायतकर्ता भरत सीएस (32) ने पुलिस को बताया कि उनकी मुलाकात वर्ष 2025 की शुरुआत में गगनदीप उर्फ गगन एन दीप (31) से एक परिचित के माध्यम से हुई थी। भरत के अनुसार, गगनदीप ने खुद को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी विभाग में एक वरिष्ठ पद पर कार्यरत बताया और अपने प्रभावशाली संपर्कों का हवाला देकर भरोसा जीत लिया।

आरोप है कि इसके बाद गगनदीप ने भरत को अत्तिबेले क्षेत्र में स्थित 53 एकड़ जमीन के कथित सौदे में निवेश का प्रस्ताव दिया, जिसे कम कीमत पर हासिल करने का दावा किया गया। भरत ने बताया कि उन्हें इस जमीन से जुड़ा एक विज्ञापन भी दिखाया गया, जिससे प्रस्ताव वास्तविक प्रतीत हुआ। इसके बाद उनसे करीब ₹5 करोड़ की बोली प्रक्रिया में भाग लेने के लिए कहा गया।

FCRF Academy Launches Premier Anti-Money Laundering Certification Program

बिडिंग फॉर्म और होटल मीटिंग से बढ़ाया गया भरोसा

शिकायत के अनुसार, गगनदीप के निर्देश पर भरत ने एक कंसल्टेंसी कंपनी को ईमेल कर बिडिंग फॉर्म भी जमा किया। इसके बाद एक होटल में हुई बैठक में आरोपी ने दावा किया कि उसने कंपनी के अधिकारियों से मुलाकात की है और ₹5 करोड़ की जमा राशि माफ कराने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद भरोसा जताते हुए उसने कहा कि वह यह राशि खुद व्यवस्था करेगा और बाद में कंपनी से वापस मिल जाएगी।

इसके बाद कथित तौर पर पैसे की मांग शुरू हुई और ₹35 लाख तुरंत ट्रांसफर करने को कहा गया। भरत ने पहले ₹20 लाख और फिर ₹15 लाख अलग-अलग खातों में भेजे। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में लेन-देन और अधिक जटिल हो गया, जिसमें आरोपी ने ₹3 करोड़ के डिमांड ड्राफ्ट जमा कराने और विभिन्न कंपनियों के खातों में फंड ट्रांसफर कराने का दावा किया।

डिमांड ड्राफ्ट और नकद लेन-देन की जांच

आरोप यह भी है कि ₹1 करोड़ का एक डिमांड ड्राफ्ट बिना जानकारी के भुनाया गया, जबकि ₹25 लाख नकद भी एक टोल प्लाजा के पास लिया गया। इसके अलावा एक ट्रस्ट से जुड़े ₹2.2 करोड़ से अधिक के डिमांड ड्राफ्ट भी कथित रूप से बिना जानकारी के हासिल किए गए।

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पहले से ही एक अन्य धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार हो चुका है, जिसमें एक म्यसूरु की कंपनी से लगभग ₹6 करोड़ की ठगी का आरोप है। बताया गया है कि इस मामले में ₹2 करोड़ से अधिक की राशि पहले ही बरामद कर सरकारी खाते में जमा कराई जा चुकी है। आरोपी के खिलाफ हैदराबाद में भी एक अलग मामला दर्ज होने की जानकारी मिली है।

निजी कंपनी और मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़ाव का दावा

जानकारी के मुताबिक, आरोपी पहले एक निजी कंपनी से जुड़ा था और मेट्रो प्रोजेक्ट से संबंधित कार्यों में भी उसकी भूमिका रही है, जिससे उसने कई लोगों का भरोसा हासिल किया।

इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता ने 24 अप्रैल को पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है, साथ ही अन्य संभावित पीड़ितों की भी तलाश की जा रही है।

फर्जी पहचान और कॉर्पोरेट कनेक्शन से बनाया भरोसा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में फर्जी पहचान और कॉर्पोरेट कनेक्शन का इस्तेमाल कर लोगों को लंबे समय तक भ्रम में रखा जाता है, जिससे बड़े वित्तीय नुकसान होते हैं।

फिलहाल मामला जांच के अधीन है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं तथा कितने और लोग इससे प्रभावित हुए हैं।

हमसे जुड़ें

Share This Article