ग्रेटर नोएडा। दनकौर क्षेत्र में पंजीकृत एक निर्माण कंपनी द्वारा फर्जी कंपनियों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का कथित तौर पर गलत लाभ लेने का बड़ा मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के गौतमबुद्ध नगर जोन ने जांच के बाद कंपनी के बैंक खाते से ₹64.28 करोड़ की वसूली पूरी कर ली है। विभाग के मुताबिक, कंपनी में करीब ₹70 करोड़ की कर संबंधी अनियमितता सामने आई थी और शेष लगभग ₹6 करोड़ की वसूली की प्रक्रिया जारी है।
विभागीय जांच में सामने आया कि कंपनी के कारोबार में पिछले वर्ष अचानक असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई। जांचकर्ताओं को संदेह हुआ कि यह वृद्धि वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के कारण नहीं, बल्कि कागजी लेनदेन और फर्जी बिलों के जरिये कारोबार बढ़ाकर दिखाने से हुई। इसके बाद कंपनी के कर रिकॉर्ड, खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज और संबंधित फर्मों के लेनदेन की पड़ताल शुरू की गई।
जांच में पता चला कि कंपनी ने पांच से छह कथित बोगस फर्मों से माल की खरीद और बिक्री दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया था। विभाग को इन लेनदेन के पीछे वास्तविक माल की आपूर्ति के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। आशंका है कि फर्जी चालानों के माध्यम से कारोबार का कृत्रिम रिकॉर्ड तैयार किया गया और उसी आधार पर कंपनी ने कर देनदारी कम करने के लिए आईटीसी का लाभ उठाया।
अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान कंपनी के वित्तीय लेनदेन में भी कई सवाल उठे। विभाग को ऐसा कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि कंपनी ने संबंधित अवधि में नकद रूप से कर या अन्य देय राशि जमा की थी। इसके बाद विभाग ने कंपनी के बैंक खातों और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच तेज कर दी।
संयुक्त आयुक्त संजय कुमार कुशवाहा के अनुसार, कंपनी कथित तौर पर सब-कंस्ट्रक्शन के नाम पर आईटीसी का अनुचित लाभ ले रही थी। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य से संबंधित फर्मों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होता है और कर नियमों के मुताबिक वास्तविक आपूर्ति के बिना केवल चालान के आधार पर आईटीसी का लाभ नहीं लिया जा सकता। विभाग ने जांच के आधार पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बैंक खाते से ₹64.28 करोड़ की राशि वसूल कर ली है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई केवल कंपनी तक सीमित नहीं है। विभाग अब उन फर्मों के आंकड़ों और लेनदेन की भी जांच कर रहा है, जिनके नाम पर कंपनी ने खरीद-बिक्री दिखाई थी। इन कंपनियों के पंजीकरण, कारोबार, चालान, बैंक लेनदेन और अन्य कर रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जांच में यदि फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है तो संबंधित फर्मों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
कर विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी आईटीसी से जुड़े मामलों में अक्सर कई कंपनियों के बीच कागजी खरीद-बिक्री का जाल बनाया जाता है। एक कंपनी फर्जी चालान के आधार पर खरीद दिखाती है, जबकि दूसरी कंपनी उसी लेनदेन को बिक्री के रूप में दर्ज करती है। इस तरह बिना वास्तविक माल की आवाजाही के कर क्रेडिट का दावा किया जाता है। ऐसे मामलों में विभाग बैंक लेनदेन, ई-वे बिल, जीएसटी रिटर्न और चालान के बीच तालमेल की जांच करता है।
गौतमबुद्ध नगर जोन में सामने आए इस मामले के बाद विभाग ने संबंधित कारोबारियों और फर्मों के आंकड़ों की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध लेनदेन से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं इसी तरीके से अन्य कंपनियों ने भी फर्जी आईटीसी का लाभ तो नहीं लिया।
विभाग के सामने अब करीब ₹6 करोड़ की शेष राशि की वसूली पूरी करने की चुनौती है। साथ ही, जांच में सामने आए पांच से छह संदिग्ध फर्मों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि इनके बीच फर्जी चालानों और बिना वास्तविक माल आपूर्ति के लेनदेन की पुष्टि होती है, तो कर चोरी के इस नेटवर्क का दायरा निर्माण कंपनी से आगे बढ़ सकता है।
