गोरखपुर। शाहपुर क्षेत्र में बशारतपुर स्थित जमीन पर थ्री स्टार होटल बनाने के नाम पर एक कारोबारी से ₹1.18 करोड़ लेने के बाद निर्माण कार्य पूरा नहीं कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि लखनऊ की निर्माण कंपनी से जुड़े तीन ठेकेदारों ने रकम लेने के बाद फर्जी बिल और रसीदें दिखाकर कारोबारी को निर्माण कार्य चलने का भरोसा दिलाया, लेकिन मौके पर सिर्फ गड्ढा खोदने के बाद काम बंद कर दिया। बाद में इस गड्ढे को पाटने में भी कारोबारी को करीब ₹10 लाख अतिरिक्त खर्च करने पड़े। शिकायत के आधार पर शाहपुर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और धमकी देने समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
धर्मपुर प्रगति विहार कॉलोनी निवासी राम अवतार सिंह ने गोरखनाथ क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी को दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि वह मेसर्स सिंघल वेंचर्स के पार्टनर हैं। बशारतपुर में उनकी जमीन पर थ्री स्टार होटल प्रस्तावित था। होटल निर्माण की जिम्मेदारी देने के लिए उन्होंने 23 अगस्त 2021 को आदिल नगर, टेढ़ी पुलिया, लखनऊ स्थित मेसर्स एसएनजीएफ रियल वेंचर्स एंड कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े ठेकेदार मो. फरीद किदवई, फैकुल्लाह खान और नसीम अहमद के साथ अनुबंध किया था।
शिकायत के मुताबिक, अनुबंध होने के बाद आरोपियों ने अलग-अलग तारीखों में कारोबारी के बैंक खाते से ₹85.27 लाख ट्रांसफर कराए। इसके अलावा ₹32.73 लाख नकद लिए गए। इस तरह कुल ₹1.18 करोड़ लेने के बाद भी होटल का निर्माण आगे नहीं बढ़ा। कारोबारी का आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपी फर्जी बिल और रसीदें दिखाते रहे और जल्द निर्माण शुरू होने तथा काम आगे बढ़ने का भरोसा दिलाते रहे।
आरोप है कि साइट पर निर्माण के नाम पर केवल गड्ढा खोदा गया और इसके बाद काम बंद कर दिया गया। काफी समय तक जब निर्माण शुरू नहीं हुआ तो कारोबारी को खुद स्थिति संभालनी पड़ी। खोदे गए गड्ढे को दोबारा पाटने में करीब ₹10 लाख खर्च हुए। इससे कारोबारी पर निर्माण की रकम के अलावा अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ा।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
राम अवतार सिंह ने शिकायत में एक कथित फर्जी इकरारनामे का भी जिक्र किया है। उनके मुताबिक, नौ अप्रैल को आरोपियों की ओर से वकील के माध्यम से उन्हें नोटिस भेजा गया था। नोटिस के साथ लगाए गए इकरारनामे को उन्होंने फर्जी बताया। उनका दावा है कि मूल अनुबंध के पैरा-18 को काटकर उस पर हस्ताक्षर किए गए थे, जबकि आरोपियों की ओर से भेजी गई प्रति में उसी पैरा में ₹50 लाख की अतिरिक्त मांग जोड़ दी गई।
कारोबारी का आरोप है कि अतिरिक्त ₹50 लाख की रकम नहीं देने पर आरोपियों ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत क्षेत्राधिकारी से कर कार्रवाई की मांग की। शिकायत की जांच के बाद क्षेत्राधिकारी के निर्देश पर शनिवार को शाहपुर पुलिस ने मो. फरीद किदवई, फैकुल्लाह खान और नसीम अहमद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
पुलिस अब मामले में अनुबंध की मूल प्रति और आरोपियों की ओर से भेजे गए कथित इकरारनामे की जांच कर रही है। इसके साथ ही ₹85.27 लाख के बैंक हस्तांतरण, ₹32.73 लाख नकद भुगतान, बिल और रसीदों की भी पड़ताल की जाएगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि निर्माण कंपनी और आरोपियों के बीच वास्तविक अनुबंध क्या था और साइट पर किए गए काम की वास्तविक लागत कितनी थी।
पुलिस दोनों पक्षों से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटा रही है। कथित धमकी और फर्जी दस्तावेज से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
