ऑपरेशन 'तूफान' के दौरान पुलिस को कॉल सेंटर से संचालित कथित ऑनलाइन लोन ऐप गिरोह का मिला सुराग; विदेशी नागरिकों समेत बड़ी संख्या में लोगों को बनाया गया निशाना, डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी

गोंडा में ₹1.13 करोड़ की संदिग्ध नकली और नशीली दवाएं जब्त, एफएसडीए-पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अवैध नेटवर्क का खुलासा

Roopa
By Roopa
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गोंडा (उत्तर प्रदेश): खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और उत्तर प्रदेश पुलिस ने नकली एवं नशीली दवाओं के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाते हुए लगभग ₹1.13 करोड़ मूल्य की संदिग्ध नारकोटिक दवाएं, कोडीन युक्त कफ सिरप और अन्य एलोपैथिक औषधियां जब्त कर सीज की हैं। तीन दिनों तक चले विशेष अभियान के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि कथित मुख्य आरोपी अभी फरार है। मामले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच जारी है।

गोपनीय सूचना पर तीन दिन तक चली संयुक्त कार्रवाई

एफएसडीए मुख्यालय के निर्देश और गोपनीय सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने 16 से 18 जुलाई के बीच गोंडा के बरियार पुरवा, सोनार गली और बड़गांव क्षेत्रों में लगातार विशेष छापेमारी अभियान चलाया।

इस अभियान में प्रदेश के नौ जिलों के औषधि निरीक्षकों और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने विभिन्न स्थानों पर जांच कर संदिग्ध दवाओं के भंडारण और वितरण से जुड़े परिसरों का निरीक्षण किया।

एक आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी की तलाश जारी

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि मामले का कथित मुख्य संचालक फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें विभिन्न संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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बिना लाइसेंस संचालित हो रहे थे कथित गोदाम

जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ में आरोपी अमन के भाई शिवम कसौधन ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह अपने भाई के साथ बरियार पुरवा स्थित परिसर से औषधियों का कारोबार संचालित करता था और उनके पास औषधि व्यापार के लिए कोई वैध लाइसेंस नहीं था।

आगे की जांच में टीम को दो अन्य गोदामों की भी जानकारी मिली, जिनके बारे में आरोप है कि वे भी बिना वैधानिक औषधि अनुज्ञप्ति के संचालित किए जा रहे थे।

निर्धारित पते पर नहीं मिली फर्म

संयुक्त टीम ने सबसे पहले अमन फार्मास्युटिकल्स के नाम से संचालित बताए गए प्रतिष्ठान की जांच की, जो गोंडा-बलरामपुर मार्ग स्थित जयनगरा, बड़गांव में दर्ज था।

अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान फर्म अपने पंजीकृत पते पर संचालित नहीं मिली और वहां उसका कोई साइनबोर्ड भी नहीं पाया गया। इसके बाद जांच का दायरा और विस्तृत कर दिया गया।

19 दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए

अधिकारियों ने मामले में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंस (NDPS) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है और 19 प्रकार की दवाओं के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे हैं।

जांच एजेंसियां जब्त दवाओं की गुणवत्ता, लाइसेंस संबंधी दस्तावेज, आपूर्ति श्रृंखला, भंडारण व्यवस्था और वितरण नेटवर्क की जांच कर रही हैं, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि दवाएं नकली थीं, अवैध रूप से संग्रहीत की गई थीं या औषधि एवं मादक पदार्थ संबंधी कानूनों का उल्लंघन किया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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