अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम के जरिए कई लोगों से वसूली; संपत्तियां फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू, आरोपियों की तलाश तेज

₹2.48 करोड़ निवेश ठगी का पर्दाफाश: चार आरोपी नामजद, बड़े रिटर्न के झांसे में फंसे निवेशक

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By Roopa
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पणजी: गोवा में निवेश के नाम पर बड़े स्तर की ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें ₹2.48 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। एक स्थानीय निवासी की शिकायत के आधार पर आर्थिक अपराध से जुड़े अधिकारियों ने चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों ने इसे संगठित वित्तीय अपराध मानते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी संपत्तियों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मामले में जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, उनमें तरुण त्रिखा और राहुल खुराना (दिल्ली), रवि शंकर ठाकुर (नवी मुंबई) और राहुल जाधव (ठाणे) शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन सभी ने मिलकर एक सुनियोजित तरीके से निवेशकों को बड़े मुनाफे का लालच दिया और अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम के जरिए उनसे करोड़ों रुपये जुटाए।

शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने दिसंबर 2022 से जनवरी 2025 के बीच अलग-अलग चरणों में निवेश का प्रस्ताव रखा। उन्होंने दावा किया कि कम समय में उच्च रिटर्न मिलेगा और निवेश पूरी तरह सुरक्षित है। इसी भरोसे में आकर कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी इन स्कीम्स में लगा दी। हालांकि, समय बीतने के साथ जब निवेशकों को न तो रिटर्न मिला और न ही मूलधन वापस किया गया, तब ठगी का शक गहराया।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए प्रोफेशनल प्रेजेंटेशन, फर्जी दस्तावेज और आकर्षक योजनाओं का सहारा लिया। कुछ मामलों में कथित तौर पर शुरुआती निवेशकों को सीमित भुगतान कर भरोसा कायम किया गया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस जाल में फंस सकें। इसके बाद बड़े स्तर पर रकम जुटाकर उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

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अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे ऑपरेशन में ‘लेयरिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसके तहत पैसों को कई बैंक खातों और चैनलों के जरिए घुमाकर ट्रैकिंग को मुश्किल बनाया जाता है। इस तरह के मामलों में डिजिटल ट्रेल को समझना और वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होती है।

जांच एजेंसियों ने आरोपियों की संभावित लोकेशन की पहचान के लिए तकनीकी और वित्तीय डेटा का विश्लेषण शुरू कर दिया है। साथ ही, बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय संसाधनों को चिन्हित कर उन्हें फ्रीज करने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि ठगी की रकम को सुरक्षित रखा जा सके और आगे की रिकवरी संभव हो सके।

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं हो सकता। संभावना है कि इसी तरह के झांसे में आकर अन्य लोग भी अपनी रकम गंवा चुके हों, लेकिन अब तक सामने नहीं आए हैं। ऐसे में अधिकारियों ने संभावित पीड़ितों से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh ने कहा, “निवेश से जुड़े ऐसे मामलों में अपराधी लोगों की लालच और भरोसे का फायदा उठाते हैं। वे स्कीम को वैध दिखाने के लिए दस्तावेजों और डिजिटल माध्यमों का सहारा लेते हैं। बिना नियामक स्वीकृति वाली योजनाओं में निवेश करना बेहद जोखिम भरा होता है। निवेश से पहले उसकी वैधता की जांच करना जरूरी है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में अनरेगुलेटेड निवेश योजनाओं के जरिए ठगी के मामलों में तेजी आई है। खासकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल नेटवर्किंग के जरिए ऐसे प्रस्ताव तेजी से फैलते हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि असामान्य रूप से उच्च रिटर्न का वादा अक्सर धोखाधड़ी का संकेत होता है।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि वित्तीय जागरूकता और सतर्कता कितनी जरूरी है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर इस ठगी के पूरे तंत्र का खुलासा किया जाएगा।

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