गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश पुलिस ने फ्लैट और व्यावसायिक दुकानों की बिक्री के नाम पर कथित ₹2.09 करोड़ की रियल एस्टेट धोखाधड़ी के मामले में 13 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी एएसआर बिल्डर सेंट्रल एवेन्यू और राइट अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बताए जा रहे हैं। मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। सभी आरोपियों को कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई और अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है।
प्राथमिकी के अनुसार, राजनगर एक्सटेंशन स्थित रिवर हाइट्स सोसायटी निवासी नितिन शर्मा ने आरोप लगाया है कि एएसआर बिल्डर सेंट्रल एवेन्यू के प्रतिनिधियों ने उन्हें व्यावसायिक दुकान में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राइट अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालकों ने चार आवासीय फ्लैट बेचने और निवेश पर आकर्षक मुनाफे का आश्वासन दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने आरोपियों को लगभग ₹1.82 करोड़ का भुगतान किया, इस भरोसे पर कि निर्धारित अवधि के भीतर व्यावसायिक दुकान और फ्लैट उपलब्ध करा दिए जाएंगे। हालांकि, तय समय बीत जाने के बाद न तो संपत्तियों का कब्जा दिया गया और न ही निवेश की गई धनराशि वापस की गई।
एक अन्य शिकायतकर्ता, नंदग्राम निवासी पूजा मल्होत्रा ने भी आरोप लगाया है कि फ्लैट और दुकान दिलाने के नाम पर उनसे लगभग ₹27 लाख की धोखाधड़ी की गई। दोनों शिकायतों को मिलाकर कथित वित्तीय नुकसान लगभग ₹2.09 करोड़ बताया गया है।
प्राथमिकी के अनुसार, जब शिकायतकर्ताओं ने अपनी धनराशि वापस मांगी, तो उन्हें कथित रूप से झूठे मुकदमों में फंसाने, जिनमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराने की धमकी भी शामिल है, का आरोप लगाया गया। पुलिस ने कहा कि इन आरोपों की भी जांच की जा रही है।
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पुलिस ने संदीप गुप्ता, प्रवीण गुप्ता, आर्यन गुप्ता, दीपक शर्मा उर्फ नितिन शर्मा, सारिका शर्मा, सुरभि, मानसी सिंह, अंकुर सिंघल, रेनू सिंघल, हनी गिल, प्रेम गिल, वरुण मक्कड़ और निधि मक्कड़ सहित 13 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इनमें से कुछ आरोपियों के खिलाफ पहले भी अन्य आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है, हालांकि उन मामलों का अंतिम परिणाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जांच अधिकारी निवेश से जुड़े अनुबंधों, भुगतान रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं ताकि शिकायतकर्ताओं के आरोपों की पुष्टि की जा सके। साथ ही धन के प्रवाह (Money Trail) का भी विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि निवेशकों से प्राप्त धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और क्या इस मामले में अन्य निवेशक भी प्रभावित हुए हैं।
Future Crime Research Foundation से जुड़े साइबर एवं वित्तीय अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, रियल एस्टेट निवेश धोखाधड़ी के मामलों में बैंकिंग रिकॉर्ड, अनुबंध, डिजिटल संचार, वित्तीय दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच के महत्वपूर्ण आधार होते हैं। धन के प्रवाह का फोरेंसिक विश्लेषण यह स्पष्ट करने में मदद करता है कि कथित धोखाधड़ी की योजना कैसे संचालित की गई और क्या इसमें किसी व्यापक नेटवर्क की संलिप्तता थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज होना या पुलिस के आरोप मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अभियोजन पक्ष को न्यायालय में दस्तावेजी, वित्तीय और अन्य स्वीकार्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने होंगे, जबकि सभी आरोपियों को कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई और अपना बचाव प्रस्तुत करने का अधिकार प्राप्त है।
पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है। यदि जांच के दौरान अन्य पीड़ितों, अतिरिक्त वित्तीय अनियमितताओं या किसी बड़े संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क के साक्ष्य सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
