गाजियाबाद: कौशांबी थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति से साइबर ठगों ने क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग के नाम पर डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की है। ठगों ने शुरुआत में मात्र 4950 रुपये निकालवाकर पीड़ित का भरोसा जीता और फिर भारी मुनाफे का लालच देकर विभिन्न बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई। मामले में साइबर थाना में एफआईआर दर्ज की गई है और जांच चल रही है।
रामप्रस्थ ग्रीन सोसाइटी में रहने वाले डॉ. पंकज नंद चौधरी ने बताया कि मई 2025 में वह इंटरनेट पर क्रिप्टो करेंसी प्लेटफॉर्म की जानकारी ले रहे थे। इसी दौरान वे एक असली दिखने वाली वेबसाइट पर पहुंचे। वेबसाइट पर दिए गए मोबाइल नंबर के माध्यम से ठगों ने उनसे संपर्क किया। केवाईसी प्रक्रिया के तहत उनका आधार और पैन कार्ड लेकर खाते का निर्माण कर दिया गया।
इसके बाद ठगों ने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में रकम भेजने को कहा। हर ट्रांजेक्शन के बाद यूटीआर नंबर मांगा जाता और खाते में क्रिप्टो करेंसी के रूप में बैलेंस दिखाई देता। डॉ. चौधरी ने बताया कि उन्होंने 21 मई 2025 को 4950 रुपये सफलतापूर्वक निकाल लिए। इस अनुभव से उन्हें प्लेटफॉर्म पर भरोसा हो गया।
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ठगों ने फिर उन्हें बड़े निवेश के लिए प्रेरित किया और अधिक निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया। पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। कुछ रकम तकनीकी कारणों से वापस भी आई। जब संदेह हुआ, तो जुलाई 2025 में ठगों ने पीड़ित को एक मोबाइल नंबर दिया और मानसी नाम की महिला से बात करवाई। महिला ने उनके खाते में 8896.85 डॉलर लोन के रूप में जोड़कर दिखाया और भारी मुनाफा प्रदर्शित किया।
जब पीड़ित ने पैसे निकालने का प्रयास किया, तो ठगों ने शर्तों और नए नियमों के बहाने निकासी नहीं होने दी। कर और तकनीकी सुरक्षा बीमा का बहाना बनाकर अतिरिक्त 39 हजार डॉलर जमा कराने को कहा गया। डॉ. चौधरी ने इतनी बड़ी रकम देने से इनकार किया, जिसके बाद ठगों ने उनके अकाउंट की पूरी राशि शून्य कर दी और प्रोफाइल बंद कर दी। इसके बाद सभी संपर्क टूट गए।
साइबर थाना के सूत्रों के अनुसार, जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी डिटेल खंगाली जा रही है। संबंधित बैंकों से जानकारी जुटाकर खाताधारकों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी और बैंकिंग विवरण मिलते ही आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी।
इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग का उपयोग कर लोगों का भरोसा जीतते हैं। शुरुआत में छोटी रकम निकालकर मानसिक तैयारी कराते हैं और फिर बड़े घोटाले को अंजाम देते हैं। निवेशक सतर्क रहें और किसी भी प्लेटफॉर्म पर बड़ी राशि डालने से पहले तकनीकी और कानूनी जांच अवश्य करें।”
साइबर एक्सपर्टों का कहना है कि ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश से पहले हमेशा वेबसाइट और ऐप की वैधता की पुष्टि करनी चाहिए। किसी भी लेन-देन से पहले दोहरी पहचान और केवाईसी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।
गाजियाबाद में यह मामला एक चेतावनी के रूप में सामने आया है कि डिजिटल निवेश में सतर्कता बेहद जरूरी है। साइबर ठग लगातार रणनीति बदलते हैं और छोटी रकम से भरोसा जीतकर बड़ी रकम की ठगी करते हैं।
साइबर थाना के अधिकारी पीड़ित के सहयोग से सभी बैंक लेन-देन का विवरण इकट्ठा कर रहे हैं। जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि ठग किस तकनीक और नेटवर्क के माध्यम से काम कर रहे थे। जल्द ही गिरफ्तारी और संबंधित खातों की ब्लॉकिंग की संभावना है।
डॉ. चौधरी की शिकायत ने इस साइबर ठगी की गंभीरता को उजागर किया है और डिजिटल निवेशकों को सतर्क रहने का संदेश दिया है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि किसी भी प्लेटफॉर्म पर निवेश से पहले तकनीकी और कानूनी जानकारी की पूरी जांच करें
