फिरोजाबाद। बैंक ऑफ इंडिया की अरांव थाना क्षेत्र के ग्राम भारौल स्थित शाखा में सामने आए 5.50 करोड़ रुपये के सोना गबन मामले की जांच पूरी हो गई है। क्राइम ब्रांच ने करीब 1536 पन्नों का आरोप पत्र तैयार कर लिया है, जिसे अगले सप्ताह अदालत में दाखिल किए जाने की तैयारी है। जांच में बैंक के निलंबित क्रेडिट अधिकारी दिलीप कुमार को कथित तौर पर पूरे गबन का मास्टरमाइंड बताया गया है। उसके साथ बैंक के तत्कालीन अधिकारियों और कथित रूप से चोरी का सोना खपाने में मदद करने वाले उसके भाई और दोस्तों को भी आरोपी बनाया गया है।
जांच के अनुसार, कथित गबन की शुरुआत वर्ष 2025 में हुई। दिलीप कुमार पर ऑनलाइन सट्टे की लत और कर्ज की किस्तों का दबाव था। आरोप है कि इसी आर्थिक दबाव के चलते उसने बैंक की तिजोरी में रखे ग्राहकों के गिरवी सोने पर नजर डाली और धीरे-धीरे उसे निकालना शुरू कर दिया। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि बैंक की सेफ से 96 ग्राहकों के कुल 5.600 किलोग्राम सोने के पैकेट कथित तौर पर निकाल लिए गए।
आरोप है कि चोरी किए गए सोने को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उसे गिरवी रखकर रकम जुटाई गई। इसके लिए दिलीप ने अपने सगे भाई राहुल और दोस्तों की मदद ली। कथित तौर पर सोने को मुथूट, आईआईएफएल और बजाज जैसी निजी वित्तीय कंपनियों में गिरवी रखा गया। इसके बदले मिले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और अन्य जरूरतों में किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
मामले का खुलासा 15 जून 2026 को हुआ। उस दिन क्रेडिट अधिकारी दिलीप कुमार बिना सूचना के बैंक से गायब हो गया। उसकी गैरहाजिरी के दौरान बैंक की सेफ खोली गई तो 96 ग्राहकों के सोने के पैकेट गायब मिले। इसके बाद शाखा में हड़कंप मच गया और बैंक के जोनल कार्यालय की ओर से अरांव थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
प्रारंभिक प्राथमिकी में तत्कालीन बैंक मैनेजर संदीप यादव, क्रेडिट अधिकारी दिलीप कुमार और स्टाफ अफसर नरेश कुमार को नामजद किया गया था। बाद में मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। जांच आगे बढ़ने के साथ कथित गबन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आती गई।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
क्राइम ब्रांच को जांच के दौरान कई अहम साक्ष्य मिले। इनमें एक गुप्त डायरी, बैंक परिसर के सीसीटीवी फुटेज और संदिग्ध बैंक खातों से संबंधित जानकारी शामिल है। इन साक्ष्यों के आधार पर जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर यह पता लगाया कि सोना बैंक से किस तरह निकाला गया और उसके बाद उसे कहां गिरवी रखा गया। जांच में बैंक के कुछ अधिकारियों की कथित लापरवाही और निगरानी में चूक को भी शामिल किया गया है।
चार्जशीट में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें दिलीप कुमार को मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बताया गया है। उसके भाई राहुल पर चोरी के सोने को ठिकाने लगाने में सहयोग करने का आरोप है। तत्कालीन बैंक मैनेजर संदीप कुमार और कैशियर एवं स्टाफ अफसर नरेश को भी आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा दिलीप के कथित सहयोगियों अंकित यादव, ऋषभ, अंकुर और भानू प्रताप को भी चार्जशीट में शामिल किया गया है।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि बैंक की सेफ से सोना निकलने के बावजूद लंबे समय तक इसकी जानकारी सामने क्यों नहीं आई। क्राइम ब्रांच ने इसी बिंदु पर बैंक की आंतरिक व्यवस्था, अधिकारियों की भूमिका और निगरानी प्रक्रिया की भी पड़ताल की है। सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों की भूमिका को जोड़ने की कोशिश की गई है।
मामले में नामजद आरोपी अजय प्रताप अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। इसी वजह से उसके खिलाफ फिलहाल आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उसके संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
1536 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत के सामने जांच में जुटाए गए दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। जांच में कथित तौर पर बैंक के ग्राहकों के गिरवी रखे सोने को निजी वित्तीय संस्थानों तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क की भूमिका भी सामने लाई गई है।
