फर्जी लॉगिन पेज बनाकर चुराए जाते थे पासवर्ड और सेशन डेटा; 25,000 अकाउंट्स की बिक्री, $20 मिलियन तक की ठगी की कोशिश उजागर

डिजिटल अंडरवर्ल्ड का भंडाफोड़: W3LL किट से लाखों यूजर्स निशाने पर, FBI-इंडोनेशिया की संयुक्त कार्रवाई

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By Roopa
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वॉशिंगटन/जकार्ता: वैश्विक स्तर पर तेजी से फैल रहे साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई में अमेरिकी जांच एजेंसी FBI और इंडोनेशिया की सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर एक संगठित फिशिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क दुनिया भर के इंटरनेट यूजर्स को निशाना बनाकर उनके अकाउंट्स की गोपनीय जानकारी चुराने और बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने में लगा हुआ था।

संयुक्त ऑपरेशन के तहत इस नेटवर्क के मुख्य डिजिटल ढांचे को जब्त कर लिया गया है, जबकि इसके कथित डेवलपर को इंडोनेशिया में हिरासत में लिया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह साइबर गिरोह एक अत्याधुनिक “फिशिंग किट” के जरिए काम कर रहा था, जिसने साइबर ठगी को एक संगठित उद्योग का रूप दे दिया था।

कैसे काम करता था ‘W3LL फिशिंग किट’

जांच में सामने आया कि इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र ‘W3LL’ नाम का एक फिशिंग टूल था, जिसे अपराधियों को “फुल-सर्विस साइबर प्लेटफॉर्म” के रूप में उपलब्ध कराया जाता था। इस टूल की मदद से अपराधी बैंकिंग वेबसाइट्स, ईमेल सर्विस और अन्य ऑनलाइन पोर्टल्स के बिल्कुल समान दिखने वाले नकली लॉगिन पेज तैयार कर लेते थे।

जैसे ही कोई यूजर इन फर्जी पेजों पर अपना यूजरनेम और पासवर्ड दर्ज करता, यह टूल तुरंत उस जानकारी को रिकॉर्ड कर लेता था। इतना ही नहीं, यह यूजर्स का सेशन डेटा भी कैप्चर कर लेता था, जिससे मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) जैसी सुरक्षा प्रणाली भी बेअसर हो जाती थी।

$500 में मिलती थी साइबर ठगी की ‘किट’

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि इस खतरनाक फिशिंग किट को महज $500 (करीब ₹40,000) में खरीदा जा सकता था। इसके साथ ही अपराधियों को ‘W3LLSTORE’ नाम के एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस तक पहुंच दी जाती थी, जहां चोरी किए गए अकाउंट्स की खरीद-फरोख्त की जाती थी।

जांच एजेंसियों के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच इस प्लेटफॉर्म के जरिए 25,000 से ज्यादा हैक किए गए अकाउंट्स बेचे गए। हालांकि 2023 में इस मार्केटप्लेस को बंद कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी यह नेटवर्क एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सक्रिय रहा और नए नामों से अपनी गतिविधियां जारी रखीं।

17,000 से ज्यादा लोग बने शिकार

रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 से 2024 के बीच इस फिशिंग किट का इस्तेमाल कर दुनिया भर में 17,000 से ज्यादा लोगों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के जरिए करीब $20 मिलियन (लगभग ₹166 करोड़) की ठगी की कोशिश की गई।

हाल ही में 10 अप्रैल को इंडोनेशिया में इस नेटवर्क से जुड़े एक प्रमुख संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जिसकी पहचान ‘G.L.’ के रूप में की गई है। हालांकि एजेंसियों ने उसकी पूरी पहचान सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन उसके पास से इस नेटवर्क से जुड़े अहम डिजिटल सबूत और इंफ्रास्ट्रक्चर बरामद किए गए हैं।

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पहली बार हुआ ऐसा अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन

यह पहली बार है जब अमेरिका और इंडोनेशिया की एजेंसियों ने मिलकर किसी फिशिंग किट डेवलपर के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई की है। जांच में अमेरिका के जॉर्जिया जिले के अभियोजन कार्यालय ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने इस साइबर नेटवर्क की पहचान और जब्ती प्रक्रिया में सहयोग किया।

साइबर अपराध बन चुका है ‘सर्विस इंडस्ट्री’

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहां अब ठगी केवल व्यक्तिगत प्रयास नहीं रही, बल्कि एक संगठित “सर्विस इंडस्ट्री” बन चुकी है। यहां अपराधियों को रेडीमेड टूल्स, डेटा और प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे आसानी से बड़े पैमाने पर ठगी कर सकें।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “आज के साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग का गहरा इस्तेमाल कर रहे हैं। वे पहले यूजर्स का भरोसा जीतते हैं और फिर धीरे-धीरे उन्हें जाल में फंसा लेते हैं।”

आम यूजर्स के लिए अलर्ट

इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता बेहद जरूरी है। यूजर्स को किसी भी अनजान लिंक या वेबसाइट पर अपनी निजी जानकारी दर्ज करने से बचना चाहिए।

साथ ही, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग, केवल आधिकारिक वेबसाइट्स पर ही लॉगिन करना और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्टिंग जैसे उपाय साइबर सुरक्षा को मजबूत बना सकते हैं।

निष्कर्ष

FBI और इंडोनेशियाई एजेंसियों की इस संयुक्त कार्रवाई ने भले ही एक बड़े साइबर नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया हो, लेकिन यह भी संकेत दिया है कि डिजिटल अपराध लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, सावधानी और सही डिजिटल व्यवहार ही आम लोगों को इस बढ़ते खतरे से सुरक्षित रख सकता है।

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