फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में फर्जी फर्मों और बैंक खातों के जरिए GST इनवॉइसिंग कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले कथित गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। बिंदकी थाना क्षेत्र में दर्ज मामले की जांच के दौरान सामने आए इस नेटवर्क में करीब ₹68 करोड़ की कथित GST धोखाधड़ी का पता चला है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से एक स्मार्टफोन भी बरामद किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य जरूरतमंद लोगों को हर महीने कमीशन देने का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खातों की जानकारी, हस्ताक्षरित चेकबुक और सिम कार्ड हासिल करते थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी फर्म और बैंक खाते खोलने में किया जाता था। इसके बाद इन्हीं फर्मों के नाम पर फर्जी GST बिल तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा किया जाता था।
अप्रैल में दर्ज हुआ था मामला
मामले में 9 अप्रैल 2026 को शैलवानी सिंह की तहरीर पर बिंदकी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच शुरू की तो कई फर्जी फर्मों और बैंक खातों के जरिए GST लेनदेन में कथित अनियमितताएं सामने आईं। जांच में यह भी पता चला कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए कारोबारी प्रतिष्ठानों का इस्तेमाल वास्तविक कारोबार के बजाय फर्जी बिलिंग और ITC के कथित खेल में किया जा रहा था।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने जरूरतमंद लोगों के दस्तावेज हासिल करने के बाद ‘JSR Sales’ समेत अन्य नामों से फर्में तैयार कराईं। इन फर्मों के नाम पर बैंक खाते खोले गए और उनका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी GST इनवॉइस जारी करने तथा इनवॉइस के आधार पर ITC क्लेम करने के लिए किया गया।
कमीशन के बदले लेते थे पूरा बैंकिंग सेटअप
पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह का तरीका बेहद संगठित था। ऐसे लोगों को निशाना बनाया जाता था जिन्हें तत्काल आर्थिक मदद या नियमित कमीशन की जरूरत होती थी। उन्हें मामूली मासिक भुगतान का भरोसा देकर उनके महत्वपूर्ण पहचान और बैंकिंग दस्तावेज अपने कब्जे में लिए जाते थे।
आरोप है कि दस्तावेज मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति के नाम पर फर्म और बैंक खाता तैयार किया जाता था, जबकि उसके वास्तविक संचालन की जानकारी खाताधारक को सीमित या नहीं होती थी। बैंक खाते, चेकबुक और सिम कार्ड पर नियंत्रण हासिल करने के बाद इनका इस्तेमाल कथित GST लेनदेन के लिए किया जाता था।
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फर्जी बिलिंग के जरिए ITC हासिल करने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, फर्जी फर्मों के नेटवर्क के जरिए कूटरचित GST बिल तैयार किए जाते थे। इन बिलों के आधार पर ITC का दावा और उसे आगे पासऑन करने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों को उनकी भूमिका के अनुसार कमीशन मिलता था।
पुलिस मुख्य सरगना बताए जा रहे संजय अग्रवाल उर्फ संजय लाला की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में फर्जी फर्म तैयार करने और दस्तावेज जुटाने से जुड़ी गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने का दावा किया गया है।
कानपुर से तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने 30 अगस्त 2026 को कानपुर नगर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनकी पहचान अरविंद श्रीवास्तव निवासी गांधी नगर, शुक्लागंज, उन्नाव; विवेक शुक्ला उर्फ संजय शुक्ला निवासी दामोदर नगर, कानपुर नगर; और दीपू गुप्ता उर्फ संजीव कुमार गुप्ता निवासी गंगागंज, पनकी, कानपुर नगर के रूप में हुई है।
पूछताछ में सामने आया कि विवेक शुक्ला ने अरविंद श्रीवास्तव की मुलाकात दीपू गुप्ता से कराई थी। इसके बाद फर्जी फर्मों के लिए दस्तावेज जुटाने और बैंकिंग व्यवस्था तैयार करने का कथित सिलसिला शुरू हुआ।
कई फर्मों और खातों की जांच जारी
पुलिस अब नेटवर्क से जुड़ी अन्य फर्जी फर्मों, बैंक खातों, GST पंजीकरण और संदिग्ध लेनदेन की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि कथित ₹68 करोड़ की धोखाधड़ी में कितनी फर्मों और बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ तथा फर्जी ITC का अंतिम लाभ किसे मिला।
मामले में BNS की विभिन्न धाराओं के साथ IT Act और GST Act के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और मुख्य सरगना तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ फर्जी फर्मों और बैंक खातों के इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।
