लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने देशभर में फर्जी IPO और ऑनलाइन शेयर बाजार निवेश के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए इसके कथित मास्टरमाइंड अनुराग अरविंद श्रीवास्तव (36) को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में इस गिरोह का संबंध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 3,087 शिकायतों से सामने आया है। जांच एजेंसियां इसे देश के बड़े फर्जी निवेश साइबर फ्रॉड नेटवर्क में से एक मानकर इसकी वित्तीय गतिविधियों और मनी ट्रेल की गहन पड़ताल कर रही हैं।
आरोपी मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक है और नागपुर के गणपति नगर, मानकापुर क्षेत्र का निवासी है। उसे 31 जुलाई को नागपुर स्थित उसके आवास से गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ लखनऊ साइबर क्राइम थाने में वर्ष 2025 में दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद ट्रांजिट रिमांड पर उसे लखनऊ लाया गया, जहां अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
जांच के अनुसार गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन जारी कर लोगों को शेयर बाजार विश्लेषण और IPO में भारी मुनाफे का लालच देता था। इच्छुक लोगों को “VIP9-6 ACI Exclusive Guidance Group” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा जाता था, जहां स्वयं को निवेश विशेषज्ञ बताने वाले लोग ऑनलाइन सत्र आयोजित करते और फर्जी ट्रेडिंग स्क्रीनशॉट दिखाकर निवेशकों का भरोसा जीतते थे।
इसके बाद पीड़ितों को एक लिंक के माध्यम से ACI Century App नामक कथित निवेश एप्लिकेशन डाउनलोड कर उसमें खाता खोलने के लिए कहा जाता था। निवेशकों से अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती थी। जांच में सामने आया कि ऐप पर निवेश और मुनाफा दिखाई देता था, लेकिन वास्तव में कोई धनराशि शेयर बाजार या IPO में निवेश नहीं की जाती थी। जब निवेशक पैसे निकालने का प्रयास करते, तो उन्हें या तो भुगतान से इनकार कर दिया जाता या अतिरिक्त राशि जमा कराने का दबाव बनाया जाता।
मामले की शुरुआत लखनऊ निवासी अपूर्वा राय की शिकायत से हुई थी, जिन्होंने साइबर क्राइम थाने में फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म के माध्यम से ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर STF ने कई महीनों तक जांच कर आरोपी तक पहुंच बनाई।
पूछताछ में सामने आया कि वर्ष 2022 में आरोपी ने विनोद कुमार राठौर, विवेक कुमार सिंह, शिवानिका, नदीम शेख, सुधीर, संचित और मुकेश सहित अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर My Ground11 Gaming Zone Pvt. Ltd. नामक कंपनी बनाई थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस कंपनी को फैंटेसी गेमिंग प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि इसका उपयोग कथित तौर पर साइबर ठगी से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों और लेनदेन के लिए भी किया गया। अब यह जांच की जा रही है कि क्या इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल साइबर अपराध से अर्जित धन को छिपाने या स्थानांतरित करने के लिए किया गया।
नागपुर में छापेमारी के दौरान जांच टीम ने एक लैपटॉप, एक आईफोन, एक एसयूवी, विभिन्न कंपनियों से जुड़े 139 दस्तावेज, तीन कंपनियों की रबर स्टैंप, अलग-अलग बैंकों की छह खाली चेकबुक, ₹3.17 करोड़ और ₹2.50 करोड़ के दो अहस्ताक्षरित चेक, एक रद्द चेक तथा दो सिम कार्ड बरामद किए। इन डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि शेल कंपनियों, बैंक खातों और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा सके।
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ अब तक कम से कम 11 साइबर अपराध मामलों का रिकॉर्ड सामने आया है। इनमें लखनऊ के साइबर क्राइम थाने और आशियाना थाने के अलावा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के श्री विजयपुरम साइबर क्राइम थाने में दर्ज मामले भी शामिल हैं। अब तक गिरोह से जुड़े बैंक खातों में जमा लगभग ₹2 करोड़ की राशि फ्रीज की जा चुकी है, जबकि अन्य वित्तीय लेनदेन, लाभार्थी खातों और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच जारी है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, फर्जी IPO और निवेश योजनाओं में अपराधी पहले विश्वास का माहौल बनाते हैं, फिर नकली ऐप और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए लोगों से बड़ी रकम निवेश कराते हैं। उन्होंने कहा कि निवेश से पहले किसी भी प्लेटफॉर्म की नियामकीय मान्यता, कंपनी का पंजीकरण और भुगतान की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से जांच करना ही ऐसे साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
