इंटरनेट डेटा के आधार पर 90 शिक्षकों को बनाया शिकार, अंतर्राज्यीय गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार, एक फरार

फर्जी BSA बनकर करोड़ों की ठगी: शिक्षकों को ट्रांसफर का डर दिखाकर वसूले ₹1.5 से 2 करोड़

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By Roopa
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वाराणसी/मऊ। बेसिक शिक्षा विभाग के नाम पर फर्जीवाड़ा कर शिक्षकों से बड़ी ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। गिरोह के दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी अभी फरार है। यह गिरोह खुद को फर्जी बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) बताकर शिक्षकों को ट्रांसफर और जांच का डर दिखाकर पैसे वसूलता था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बरेली जनपद के फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र के रहने वाले व्यक्तियों के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि ये आरोपी सुनियोजित तरीके से शिक्षकों का डेटा जुटाकर उन्हें फोन करते थे और डर का माहौल बनाकर ऑनलाइन ठगी को अंजाम देते थे।

एक मामले में आरोपी ने एक महिला शिक्षिका को फोन कर कहा कि उसका ट्रांसफर रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए तुरंत ₹50 हजार भेजने होंगे। दबाव और डर के चलते शिक्षिका ने बताए गए स्कैनर के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर दी। कुछ समय बाद जब कॉल बंद हो गया और संपर्क नहीं हुआ तो ठगी का खुलासा हुआ।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने अब तक करीब 90 शिक्षकों को निशाना बनाकर लगभग ₹1.5 से ₹2 करोड़ तक की ठगी की है। आरोपी इंटरनेट से शिक्षकों से जुड़ी जानकारी, शिकायतें और ट्रांसफर से संबंधित डाटा खोजते थे और उसी के आधार पर टारगेट तय करते थे।

गिरोह का तरीका पूरी तरह योजनाबद्ध था। पहले आरोपी ग्राम प्रधानों या स्थानीय स्रोतों से शिक्षकों के मोबाइल नंबर हासिल करते थे। इसके बाद खुद को शिक्षा विभाग का वरिष्ठ अधिकारी बताकर फोन करते और ट्रांसफर या जांच का डर दिखाकर दबाव बनाते थे। इसके बाद पीड़ितों को तत्काल भुगतान के लिए मजबूर कर दिया जाता था।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों और एटीएम कार्ड के जरिए निकाली जाती थी। बाद में यह पैसा गिरोह के सदस्यों में बांट दिया जाता था। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और पहले भी इनके खिलाफ साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं।

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पुलिस ने दोनों आरोपियों को उनके घरों से गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उन्होंने अपने नेटवर्क और ठगी के पूरे तरीके का खुलासा किया है। वहीं तीसरे फरार आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

बरामद सामग्री में कई शिक्षकों के दस्तावेज, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल डेटा शामिल हैं, जिससे साफ होता है कि यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सबसे बड़ा हथियार डर होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी करते हैं। सरकारी अधिकारी बनकर कॉल करना और तुरंत कार्रवाई का दबाव बनाना इनकी मुख्य रणनीति होती है।

अधिकारियों ने कहा है कि डिजिटल ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है और नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के प्रयास जारी हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें और तुरंत कोई भुगतान न करें। किसी भी सरकारी अधिकारी की पहचान की पुष्टि संबंधित विभाग से अवश्य करें। ओटीपी, बैंक डिटेल्स या स्कैनर लिंक किसी के साथ साझा न करें और संदिग्ध नंबरों की शिकायत तुरंत साइबर सेल में करें।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह म्यूल बैंक खातों का उपयोग कर पैसे को तुरंत निकाल लेता था, जिससे ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था। अब इनके वित्तीय नेटवर्क और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच की जा रही है ताकि अन्य पीड़ितों और सहयोगियों की पहचान की जा सके।

यह पूरा मामला दर्शाता है कि कैसे शिक्षा विभाग के नाम का दुरुपयोग कर एक संगठित गिरोह ने डर और भ्रम का फायदा उठाकर बड़ी साइबर ठगी को अंजाम दिया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की धमकी या ट्रांसफर संबंधी कॉल को सत्यापित किए बिना कोई कदम न उठाएं और सतर्क रहें।

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