क्रिप्टो फ्रॉड और साइबर हैकिंग नेटवर्क से जुड़े केस में 12 ठिकानों पर छापेमारी, Sriki लिंक की गहन जांच जारी

मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो कनेक्शन: बेंगलुरु में ED की बड़ी रेड, डिजिटल ट्रेल्स की जांच तेज

Roopa
By Roopa
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बेंगलुरु में कथित क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 स्थानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दायरे में कांग्रेस नेता N. Haris और उनके दो बेटों से जुड़े परिसरों को भी शामिल किया गया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई।

अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी उस व्यापक जांच का हिस्सा है जो कथित साइबर हैकिंग के जरिए अर्जित अवैध धन और उसके क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से किए गए लेनदेन से जुड़ी हुई है। जांच का केंद्र कथित हैकर Srikrishna Ramesh उर्फ Sriki है, जिस पर पहले भी कई साइबर अपराधों और डिजिटल घोटालों के आरोप लग चुके हैं।

सूत्रों का कहना है कि ED यह पता लगाने में जुटी है कि क्या सरकारी पोर्टल्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की कथित हैकिंग से प्राप्त धन को राजनीतिक या अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों तक पहुंचाया गया था। हालांकि एजेंसी ने अब तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय नहीं किए हैं, लेकिन बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन डेटा की गहन जांच की जा रही है।

यह मामला पहले से कर्नाटक पुलिस द्वारा दर्ज जांच से जुड़ा है, जिसमें वर्ष 2021 में Sriki के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। उस पर ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और एक सरकारी वेबसाइट को हैक करने के आरोप लगे थे। जांच में यह भी सामने आया था कि वह एक व्यापक क्रिप्टो और अवैध वित्तीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।

ED अधिकारियों के अनुसार, जांच का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कथित अवैध धन को कैसे ट्रांसफर, छिपाया और वैध दिखाने की कोशिश की गई। इसके लिए एजेंसी ब्लॉकचेन डेटा, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल वॉलेट्स की बारीकी से जांच कर रही है।

छापेमारी के दौरान बेंगलुरु में कई आवासीय और व्यावसायिक परिसरों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए। इन सबूतों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि डिजिटल ट्रांजैक्शन का पूरा नेटवर्क समझा जा सके।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस कथित साइबर फ्रॉड से प्राप्त धन को शेल कंपनियों, फर्जी संस्थाओं या बिचौलियों के माध्यम से निवेश या ट्रांसफर किया गया था। एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों और वित्तीय लिंक की भी जांच कर रही हैं।

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हालांकि इस कार्रवाई में एक राजनीतिक नेता से जुड़े परिसरों के शामिल होने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, लेकिन जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्रवाई केवल वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की जा रही है, न कि किसी राजनीतिक उद्देश्य से।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले अपराधों पर नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि इनकी ट्रांजैक्शन प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं होती और इन्हें ट्रैक करना कठिन होता है। यही कारण है कि ED और अन्य एजेंसियां ऐसे मामलों में लगातार अपनी निगरानी और सख्ती बढ़ा रही हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड और डिवाइस की फॉरेंसिक जांच जारी है। इसके आधार पर आगे पूछताछ की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो अन्य लोगों को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।

फिलहाल मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में फॉरेंसिक ऑडिट तथा डिजिटल ट्रेल्स की पुष्टि के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

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