ED ने फर्जी टेक्निकल सपोर्ट कॉल सेंटर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी मामले में ₹187.13 करोड़ मूल्य की संपत्तियां कुर्क की हैं।

ईडी की बड़ी कार्रवाई: अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी मामले में ₹187.13 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

Team The420
5 Min Read

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े धनशोधन मामले में ₹187.13 करोड़ मूल्य की संपत्तियां कुर्क की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है। कुर्क की गई संपत्तियों में दिल्ली, हरियाणा और गोवा स्थित आलीशान फार्महाउस, विला तथा अन्य उच्च-मूल्य की अचल संपत्तियां शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला एक ऐसे कथित साइबर ठगी गिरोह से जुड़ा है, जिसने फर्जी टेक्निकल सपोर्ट कॉल के जरिए अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी की।

धनशोधन का यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है। यह प्राथमिकी अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) से प्राप्त जानकारी के आधार पर दर्ज की गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी अवैध कॉल सेंटर संचालित कर अमेरिकी नागरिकों से टेक्निकल सपोर्ट अधिकारी बनकर संपर्क करते थे और विभिन्न बहानों से उनसे धनराशि ऐंठते थे।

FutureCrime Summit 2026 to Unveil Landmark White Paper on Future Policing & Advanced Cyber Forensics

मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच के अनुसार यह एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क था, जिसमें कॉल सेंटर संचालन, पीड़ितों से संपर्क और धन के लेनदेन के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई थीं।

ईडी के अनुसार गिरोह कथित रूप से “डिजीकैप्स – द फ्यूचर ऑफ डिजिटल” नाम से एक अवैध कॉल सेंटर संचालित कर रहा था, जहां लगभग 36 कर्मचारी कार्यरत थे। एजेंसी का आरोप है कि इस संचालन की निगरानी जोनी, दक्षय सेठी और गौरव वर्मा कर रहे थे, जबकि जिगर अहमद, यश खुराना, इंद्रजीत सिंह भाली और निखिल शर्मा सहित अन्य कर्मचारी कथित रूप से टेक्निकल सपोर्ट अधिकारी बनकर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे।

जांच में आरोप है कि कॉल करने वाले पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनके कंप्यूटर या डिजिटल अकाउंट में गंभीर तकनीकी समस्या आ गई है। इसके बाद उनसे संवेदनशील व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी प्राप्त की जाती थी। कई मामलों में पीड़ितों को अमेरिकी इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) की ओर से कार्रवाई का झूठा डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाया गया और उन्हें गिरोह के नियंत्रण वाले क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में धनराशि भेजने के लिए मजबूर किया गया।

ईडी के अनुसार साइबर ठगी से प्राप्त धन को उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाने के उद्देश्य से कई संस्थाओं के माध्यम से घुमाया गया। जांच में आरोप है कि ब्लिस इंफ्राप्रॉपर्टीज एलएलपी सहित कुछ शेल संस्थाओं का उपयोग कथित अवैध धन को विभिन्न वित्तीय लेनदेन के जरिए वैध स्वरूप देने के लिए किया गया। इसके बाद इस राशि का निवेश कथित रूप से महंगी अचल संपत्तियों और अन्य उच्च-मूल्य परिसंपत्तियों में किया गया।

इस वर्ष जनवरी और फरवरी के दौरान ईडी ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 13 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया था। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने डिजिटल उपकरण, ₹34 लाख नकद तथा वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य बरामद किए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि इन दस्तावेजों से आरोपियों के भारत और विदेश में किए गए निवेश तथा संपत्ति खरीद से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले।

ईडी ने वित्तीय जांच के आधार पर पाया कि कथित अपराध से अर्जित धन का एक बड़ा हिस्सा अचल संपत्तियों में निवेश किया गया था। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर एजेंसी ने ₹187.13 करोड़ मूल्य की संपत्तियां पीएमएलए के तहत कुर्क कर दी हैं ताकि जांच पूरी होने तक उनका हस्तांतरण या निपटान न किया जा सके।

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और धनशोधन नेटवर्क से जुड़े इस मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी विदेशी वित्तीय लेनदेन, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तथा कथित अपराध से अर्जित धन के निवेश और उसे छिपाने में शामिल अन्य व्यक्तियों एवं संस्थाओं की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले नए साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article