बलरामपुर में ₹58 करोड़ की साइबर ठगी के खुलासे के बाद पुलिस ने किराये के बैंक खातों, मोबाइल सिम और संगठित ऑनलाइन फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

फर्जी इलाज का खेल: ECHS कार्ड के नाम पर चल रहा था ‘मेडिकल फ्रॉड रैकेट’, चार गिरफ्तार

Team The420
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ग्रेटर नोएडा। पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS) कार्ड के जरिए फर्जी तरीके से इलाज कराने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में चार आरोपियों—दानिश खान, शिखा सिंह, यश सिंह और जितेंद्र यादव—को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह का एक अन्य सदस्य प्रदीप फरार है। आरोपियों के पास से फर्जी दस्तावेज और एक महंगा मोबाइल फोन बरामद हुआ है, जिसमें कई अहम डिजिटल सबूत मिले हैं।

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाता था। ऐसे मरीज, जो इलाज का खर्च वहन नहीं कर सकते थे, उन्हें लालच देकर दूसरे व्यक्तियों के नाम और पहचान पर अस्पतालों में भर्ती कराया जाता था। इसके बदले गिरोह मोटी रकम वसूलता था और अस्पतालों से इलाज का खर्च बचा लिया जाता था।

मामले का खुलासा एक महिला की मौत के बाद हुआ। जांच में पता चला कि अलीगढ़ निवासी शालिनी के ECHS कार्ड और आधार कार्ड का फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के जरिए गाजियाबाद निवासी तनु को 29 जुलाई 2025 को शालिनी के नाम से अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान करीब ₹6.5 लाख का खर्च आया, जिसे इस फर्जीवाड़े के जरिए बचा लिया गया।

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हालांकि, 5 अगस्त 2025 को इलाज के दौरान तनु की मौत हो गई। इसके बावजूद आरोपियों ने अस्पताल में उसकी असली पहचान छिपाए रखी और शालिनी के नाम पर ही डेथ सर्टिफिकेट बनवाकर शव ले लिया। यही वह बिंदु था, जहां से पूरे गिरोह की गतिविधियों पर संदेह गहराया और जांच शुरू हुई।

पूछताछ में सामने आया कि शिखा सिंह ने अपनी बहन तनु के इलाज के लिए इस नेटवर्क से संपर्क किया था। आर्थिक तंगी के चलते वह इलाज कराने में असमर्थ थी। इसी दौरान उसकी पहचान दानिश खान से कराई गई, जिसने कम खर्च में बड़े अस्पताल में इलाज कराने का भरोसा दिया। इसके लिए उसने मरीज की पहचान बदलकर किसी और के दस्तावेजों का इस्तेमाल करने की शर्त रखी।

दानिश खान ने व्हाट्सएप के जरिए शालिनी का ECHS कार्ड और आधार कार्ड भेजा, जिनका उपयोग कर तनु को भर्ती कराया गया। इस काम के बदले शिखा ने दानिश को करीब ₹65 हजार ऑनलाइन ट्रांसफर किए, जबकि कुछ रकम नकद दी गई। इस तरह गिरोह हर केस में अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ठगी को अंजाम देता था।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। इसके सदस्य पहले ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिन्हें महंगे इलाज की जरूरत होती थी लेकिन वे खर्च उठाने में असमर्थ होते थे। इसके बाद उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता था। अस्पतालों में कथित ‘सेटिंग’ के चलते बिना सख्त सत्यापन के मरीजों को भर्ती कर लिया जाता था।

गिरोह का मुख्य सरगना दानिश खान और उसका साथी प्रदीप बताया जा रहा है, जो फर्जी ECHS और आधार कार्ड की व्यवस्था करते थे। दोनों पहले भी इसी तरह के मामलों में जेल जा चुके हैं, लेकिन जमानत पर छूटने के बाद फिर से इस अवैध धंधे में सक्रिय हो गए।

जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क में अस्पताल कर्मियों की क्या भूमिका रही और किन-किन अस्पतालों में इस तरह के फर्जी इलाज कराए गए। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया है।

फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और फरार आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है। शुरुआती जांच के आधार पर यह मामला एक बड़े संगठित मेडिकल फ्रॉड रैकेट का संकेत देता है, जिसमें आगे और खुलासे होने की संभावना है।

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