धनबाद में पुलिस ने जाली लॉटरी टिकट छापने वाले कथित अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ कर ₹160 करोड़ के नकली टिकट जब्त किए हैं।

धनबाद में जाली लॉटरी छापने वाले अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़, ₹160 करोड़ के नकली टिकट जब्त

Team The420
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धनबाद: झारखंड पुलिस ने धनबाद जिले में संचालित एक बड़े जाली लॉटरी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए करीब ₹160 करोड़ मूल्य के नकली लॉटरी टिकट, प्रिंटिंग मशीनें और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। चिरकुंडा पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई में एक परित्यक्त भवन में चल रहे कथित अवैध प्रिंटिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस का आरोप है कि यह गिरोह जाली लॉटरी टिकटों के माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था और इसका नेटवर्क झारखंड के अलावा कई अन्य राज्यों तक फैला हुआ था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि चिरकुंडा थाना क्षेत्र के बाबूउंडाल मोड़ के पास भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के एक बंद पड़े जर्जर भवन में अवैध रूप से जाली लॉटरी टिकटों की छपाई और बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर निरसा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) लिलेश्वर महतो के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने मौके पर छापेमारी की, जहां एक बड़े पैमाने पर संचालित जाली लॉटरी प्रिंटिंग यूनिट का पता चला।

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तलाशी के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में छपे हुए जाली लॉटरी टिकट, अत्याधुनिक प्रिंटिंग मशीनें, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण बरामद किए, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से नकली लॉटरी टिकट तैयार करने में किया जा रहा था। पुलिस ने बरामद सामग्री का अनुमानित मूल्य लगभग ₹160 करोड़ बताया है। जब्त मशीनों, दस्तावेजों और अन्य सामग्री को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की जा सके।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने निरसा क्षेत्र के सावलापुर कालूबथान निवासी स्वरूप मल्लिक को मौके से गिरफ्तार किया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार में शामिल था। पुलिस अब उसके बयान का सत्यापन कर रही है तथा उसके वित्तीय लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह रैकेट लंबे समय से सक्रिय था और संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था।

ग्रामीण पुलिस अधीक्षक एस. मोहम्मद याकूब ने बताया कि प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के तार केवल झारखंड तक सीमित नहीं पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क का संबंध बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से भी जुड़ा हुआ है। इन राज्यों की संबंधित पुलिस एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, वितरकों और सहयोगियों की पहचान की जा रही है।

मामले में पुलिस ने कई अन्य संदिग्धों की तलाश भी तेज कर दी है। बाबूउंडाल निवासी तीन भाइयों—प्रकाश सिंह, भानुप्रताप सिंह और जय सिंह उर्फ पिंटा उर्फ भगत सिंह—के अलावा पिठा कियारी निवासी ननहकू की भी सरगर्मी से तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन लोगों की इस कथित जाली लॉटरी नेटवर्क के संचालन और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, फरार आरोपियों में शामिल कुछ व्यक्तियों के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रकाश सिंह के खिलाफ डाल्टनगंज, निरसा, चिरकुंडा और गिरिडीह टाउन थाना क्षेत्रों में विभिन्न मामले दर्ज हैं। वहीं जय सिंह उर्फ पिंटा उर्फ भगत सिंह के खिलाफ जामताड़ा और बिहार के गोपालगंज में शराब तस्करी से जुड़े मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन पुराने मामलों का इस कथित जाली लॉटरी रैकेट से कोई संबंध है या नहीं।

पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि धनबाद जिले में एक अन्य लॉटरी सिंडिकेट के सक्रिय होने की जानकारी भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों का कहना है कि उस नेटवर्क से संबंधित सूचनाओं का सत्यापन किया जा रहा है और जल्द ही उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जब्त प्रिंटिंग मशीनों, डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि धन के प्रवाह, नेटवर्क की संरचना और सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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