देशभर में तेजी से फैल रहे साइबर अपराध के बीच धनबाद में करीब ₹3 करोड़ की साइबर ठगी से जुड़े दो मामलों का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर अलग-अलग तरीकों से ऑनलाइन धोखाधड़ी करने और फर्जी बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन में भूमिका निभाने का आरोप है।
जांच से पता चला है कि एक मामले में सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेकर पीड़ित को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर झांसा दिया गया, जबकि दूसरे मामले में फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर बड़े पैमाने पर अवैध ट्रांजैक्शन किए गए। दोनों मामलों को साइबर अपराध के बढ़ते नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
मैसेजिंग ऐप पर ‘डायरेक्टर’ बनकर ₹50 लाख ठगे
पहला मामला इस वर्ष जनवरी में सामने आया, जब धनबाद के भूईफोड़ मंदिर इलाके के रहने वाले अभय कुमार अग्रवाल ने शिकायत दर्ज कराई कि एक व्यक्ति ने खुद को कंपनी का डायरेक्टर बताकर उनसे संपर्क किया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने एक इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बातचीत शुरू की और भरोसा जीतने के बाद पीड़ित को तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया। झांसे में आकर पीड़ित ने ₹50 लाख एक बैंक खाते में भेज दिए।
बाद में जब उन्हें शक हुआ तो उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। जांच में यह रकम एक सहकारी समिति के बैंक खाते में ट्रांसफर होने का पता चला। डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद पुलिस टीम ने कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के होसानगर इलाके से मोहम्मद अफसर (41) को गिरफ्तार किया।
बताया गया कि वह उस खाते के संयुक्त धारकों में शामिल था जिसमें ठगी की रकम भेजी गई थी। जांच में यह भी पता चला है कि इस खाते से जुड़े दो अन्य सहयोगी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
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फर्जी कंपनियों के खाते खोलकर ₹2.5 करोड़ का ट्रांजैक्शन
दूसरा मामला धनबाद के सरायढेला क्षेत्र से जुड़ा है, जहां मनी म्यूल नेटवर्क के जरिए अवैध बैंकिंग गतिविधियों का खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया कि आरोपी मनीष सिंह (50) ने राष्ट्रीयकृत बैंक में फर्जी कंपनियों के नाम पर कई चालू खाते खुलवाए। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से जुड़े पैसे के लेन-देन के लिए किया जाता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन खातों के जरिए सिर्फ एक सप्ताह के भीतर करीब ₹2.5 करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ। रकम का स्रोत और अंतिम गंतव्य संदिग्ध पाए जाने के बाद आरोपी को हिरासत में लिया गया।
पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दूसरे राज्यों से जुड़े लोगों की भी भूमिका हो सकती है। फिलहाल आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
साइबर गिरोहों में बढ़ रहा ‘मनी म्यूल’ नेटवर्क
साइबर अपराध से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ठगों ने मनी म्यूल नेटवर्क का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इसमें अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर या किराए पर लेकर उनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती है, ताकि असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी पहचान और बैंकिंग नेटवर्क के दुरुपयोग का सहारा लेते हैं।
उनके अनुसार, “साइबर अपराधी पहले भरोसा बनाते हैं और फिर पीड़ित को जल्दबाजी में पैसा ट्रांसफर करने के लिए दबाव डालते हैं। इसके बाद रकम कई खातों में घुमाई जाती है, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।”
जांच का दायरा बढ़ा, अन्य सदस्यों की तलाश
जांच एजेंसियां अब इन मामलों को आपस में जोड़कर देख रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या दोनों घटनाओं के पीछे कोई बड़ा साइबर नेटवर्क सक्रिय है।
डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रेल और मोबाइल डेटा की जांच के आधार पर गिरोह के अन्य संदिग्ध सदस्यों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि अनजान लोगों के कहने पर किसी भी बैंक खाते में तुरंत पैसा ट्रांसफर न करें, और किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल की स्थिति में पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।
