दिल्ली पुलिस ने पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी की जांच के लिए क्राइम ब्रांच के तहत नई स्पेशल STF का गठन किया है।

पेपर लीक पर दिल्ली पुलिस का बड़ा प्रहार: नई स्पेशल STF का गठन, UPSC, NTA, SSC समेत सभी प्रमुख परीक्षाएं दायरे में

Team The420
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नई दिल्ली: देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में दिल्ली पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए क्राइम ब्रांच के तहत एक विशेष स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है। यह नई इकाई पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और अन्य संगठित परीक्षा अपराधों की जांच करेगी। यह STF सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत कार्य करेगी और प्रश्नपत्र लीक, प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन), नकल कराने वाले गिरोहों तथा परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान देगी।

अधिकारियों के अनुसार हाल के वर्षों में देशभर में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक तथा परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस विशेष इकाई का गठन किया गया है। सरकार और जांच एजेंसियों का मानना है कि वित्तीय जांच, साइबर फोरेंसिक और संगठित अपराधों की जांच में विशेषज्ञता रखने वाली समर्पित टीम ऐसे मामलों का तेजी से खुलासा करने और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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नई STF का अधिकार क्षेत्र देश की कई प्रमुख परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं तक विस्तारित होगा। इनमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRBs), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) तथा अधिसूचित अन्य सरकारी परीक्षा प्राधिकरण शामिल हैं। एकीकृत जांच व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न एजेंसियों से जुड़े मामलों में समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि STF केवल व्यक्तिगत मामलों की जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संगठित पेपर लीक सिंडिकेट, भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर करने वाले गिरोह, डमी उम्मीदवार उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क तथा डिजिटल माध्यमों से परीक्षा धोखाधड़ी संचालित करने वाले संगठनों की पहचान और उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने पर भी ध्यान देगी। जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, संचार रिकॉर्ड और विभिन्न राज्यों में सक्रिय संदिग्धों के आपसी संबंधों का भी विश्लेषण किया जाएगा।

नई इकाई की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अभियोजन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना भी होगी, ताकि ऐसे मामलों में आरोपपत्र समय पर दाखिल हो सकें और अदालतों में मुकदमों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि तेज जांच और प्रभावी अभियोजन से दोषसिद्धि की संभावना बढ़ेगी तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करने वाले संगठित गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

यह कदम सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के लागू होने के बाद उठाया गया है। इस कानून के तहत पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े अपराधों के लिए कड़े दंड और व्यापक जांच प्रावधान किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और लाखों अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना है।

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों ने भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। उनके अनुसार विशेष जांच इकाई के गठन से केवल व्यक्तिगत आरोपियों के बजाय पूरे आपराधिक नेटवर्क की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाने में मदद मिलेगी, जिससे परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत होगा।

Algoritha Security के एक शोधकर्ता के अनुसार, आधुनिक पेपर लीक गिरोह एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, क्लाउड स्टोरेज, डिजिटल भुगतान प्रणालियों और सुरक्षित संचार माध्यमों का उपयोग कर अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं। उनका कहना है कि डिजिटल फोरेंसिक, वित्तीय खुफिया विश्लेषण, मेटाडेटा जांच और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण तकनीकों का संयुक्त उपयोग जांच एजेंसियों को संगठित परीक्षा अपराधों के पूरे नेटवर्क की पहचान करने और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि नई STF का गठन परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक संस्थागत पहल है। नई कानूनी व्यवस्था के तहत अब जांच एजेंसियां खुफिया सूचनाओं, अंतर-एजेंसी समन्वय और प्रौद्योगिकी आधारित जांच तकनीकों के माध्यम से पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करेंगी, ताकि देश की प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

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