नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने साइबर वित्तीय अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह पर फर्जी ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए एक व्यक्ति से ₹47.20 लाख की ठगी करने का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को स्टॉक मार्केट, इक्विटी और IPO में भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित करता था। इसके बाद पीड़ितों से अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे।
यह मामला साइबर पुलिस स्टेशन (साउथ वेस्ट जिला) में दर्ज एक ई-FIR के आधार पर सामने आया, जिसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे एक फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश के लिए प्रेरित किया गया था। आरोपी उसे लगातार नकली प्रॉफिट स्क्रीन और बढ़ते रिटर्न दिखाकर और पैसे लगाने के लिए मजबूर करते रहे।
जांच के दौरान पुलिस ने “Orange Herbs Private Limited” के नाम से खोले गए एक करंट अकाउंट को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य “लेयर-1 अकाउंट” पाया। अधिकारियों के अनुसार इस खाते में ठगी की रकम में से लगभग ₹3 लाख ट्रांसफर किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि यह खाता कम से कम 12 अन्य साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा हुआ था, जिससे इसके बड़े नेटवर्क में इस्तेमाल की पुष्टि हुई।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस गिरोह को पकड़ने के लिए हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में तकनीकी सर्विलांस और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर कई ऑपरेशन चलाए। लंबे ट्रैकिंग ऑपरेशन के बाद आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
पहला आरोपी विशाल चौहान (47), निवासी जींद, हरियाणा को गिरफ्तार किया गया। उस पर आरोप है कि उसने कमीशन के बदले अपने बैंक अकाउंट, सिम कार्ड, डेबिट कार्ड और चेकबुक गिरोह को उपलब्ध कराए। जांच में सामने आया कि उसे इस काम के लिए करीब ₹50,000 मिले थे। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से कई मोबाइल फोन भी बरामद किए गए, जिनका उपयोग ठगी के संचालन में किया जा रहा था।
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दूसरा आरोपी ऋत्विक यादव को जयपुर, राजस्थान से पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार वह इस नेटवर्क में मध्यस्थ (मीडिएटर) की भूमिका निभा रहा था और बैंक किट तथा सिम कार्ड्स को एक जगह से दूसरी जगह सप्लाई करता था, जिसके बदले उसे कमीशन मिलता था।
तीसरा आरोपी प्रियल प्रताप यादव (22), निवासी मैनपुरी, उत्तर प्रदेश को दिल्ली के किंग्सवे कैंप इलाके से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से भी साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन बरामद हुआ है।
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह बड़े पैमाने पर लोगों और कंपनियों के बैंक खातों को कमीशन पर खरीदकर या किराए पर लेकर इस्तेमाल करता था। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग लेयर में घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाई जाती थी। इस काम के लिए कमीशन दर 25% से 40% तक होती थी।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि लगातार तकनीकी निगरानी और अंतरराज्यीय कार्रवाई के चलते इस नेटवर्क का खुलासा संभव हो सका। फिलहाल दो आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि बाकी की पूछताछ जारी है।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि नागरिक किसी भी फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म से सावधान रहें, जो कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे साइबर फ्रॉड नेटवर्क लगातार नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं, इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी है।
