दक्षिणी दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम जिले के साइबर थाना पुलिस ने “ऑपरेशन साइबर हॉक-04” के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान के दौरान कुल 57 मामलों में 113 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं थी, बल्कि दिल्ली, गोवा, मुंबई और गुरुग्राम समेत कई शहरों में फैले नेटवर्क को ध्यान में रखकर की गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों से जुड़े “म्यूल अकाउंट” यानी ऐसे बैंक खाते, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी की रकम निकालने और घुमाने के लिए किया जाता था, कुल 303 एनसीआरपी शिकायतों से जुड़े पाए गए। इन शिकायतों का संबंध लगभग 22 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी से बताया गया है। पुलिस ने पीड़ितों के खातों से 17 लाख रुपये की रकम “लियन” के तहत सुरक्षित भी कराई है, ताकि आगे की कार्रवाई में उसे संरक्षित रखा जा सके।
मामले की जांच में यह भी पता चला कि गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाता था। एक शिकायत में आरोप है कि इंस्टाग्राम पेज “@flypedia.ca” के जरिए टोरंटो से दिल्ली की फ्लाइट टिकट पर भारी छूट का लालच देकर करीब 3.8 लाख रुपये की ठगी की गई। इसके बाद पीड़ित से व्हाट्सएप पर एक विदेशी नंबर के जरिए संपर्क किया गया। जांच के लिए साइबर थाने की विशेष टीम ने सोशल मीडिया प्रोफाइल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टीएसपी डेटा, डिजिटल फुटप्रिंट, मनी ट्रेल और तकनीकी निगरानी का विश्लेषण किया, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
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तकनीकी जांच और छापेमारी के दौरान पुलिस ने गोवा और मुंबई में सक्रिय कुछ संदिग्ध डिवाइस भी ट्रेस किए। इसी आधार पर 34 वर्षीय मुदुल जोशी को गिरफ्तार किया गया, जो गोवा में कॉल सेंटर स्थापित कर और मुंबई से म्यूल अकाउंट हासिल कर इस ठगी नेटवर्क का संचालन कर रहा था। पुलिस के अनुसार, वह धोखाधड़ी के पैसे के प्रबंधन और ट्रांसफर की अहम कड़ी था।
आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया गया है। इनमें 47.79 लाख रुपये नकद, एक मर्सिडीज एस क्लास कार, छह लैपटॉप, 85 मोबाइल फोन, 11 पासबुक, 42 डेबिट कार्ड, 135 म्यूल सिम कार्ड, एक वाई-फाई राउटर और एक पैन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा पूछताछ और सत्यापन के लिए 488 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराध के संगठित और पेशेवर रूप को उजागर करती है। अब जांच एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, खातों और तकनीकी संसाधनों की पहचान में जुटी हैं। इस मामले ने एक बार फिर दिखाया है कि ऑनलाइन छूट, फर्जी बुकिंग और सोशल मीडिया आधारित ऑफर कितनी बड़ी साइबर ठगी का हिस्सा हो सकते हैं।
