नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की दक्षिण जिला साइबर थाना टीम ने क्रेडिट कार्ड रिप्लेसमेंट के नाम पर ग्राहकों के साथ कथित साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एक निजी बैंक के मौजूदा और पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी बैंक की आंतरिक प्रक्रियाओं और ग्राहकों के संवेदनशील डेटा का कथित तौर पर दुरुपयोग कर उनकी जानकारी के बिना रिप्लेसमेंट क्रेडिट कार्ड जारी कराते थे और बाद में उन कार्डों की पूरी क्रेडिट लिमिट का इस्तेमाल कर महंगी खरीदारी करते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकदी, फर्जी तरीके से जारी किए गए क्रेडिट कार्ड, मोबाइल फोन और बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद निवासी 33 वर्षीय मुकेश और दिल्ली के उत्तम नगर निवासी 34 वर्षीय अनिल कुमार के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि दोनों आरोपियों को बैंक की कार्ड जारी करने की प्रक्रिया और ग्राहक सत्यापन प्रणाली की विस्तृत जानकारी थी। इसी जानकारी का कथित तौर पर दुरुपयोग कर उन्होंने ग्राहकों की जानकारी के बिना रिप्लेसमेंट क्रेडिट कार्ड जारी कराए और कार्ड सक्रिय होने के बाद उनकी पूरी क्रेडिट सीमा का इस्तेमाल किया।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹7.15 लाख नकद, ग्राहकों के नाम पर फर्जी तरीके से जारी किए गए आठ क्रेडिट कार्ड, सात मोबाइल फोन तथा 16 इलेक्ट्रॉनिक घरेलू उपकरण बरामद किए। बरामद सामान में एलईडी टीवी, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, माइक्रोवेव ओवन, इंडक्शन कुकटॉप, मिक्सर ग्राइंडर, स्टीम आयरन और स्टेबलाइजर शामिल हैं। इसके अलावा खरीदारी के बिल, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने ग्राहकों को निशाना बनाया, कितने रिप्लेसमेंट कार्ड कथित रूप से फर्जी तरीके से जारी किए गए और इस पूरी साजिश से कुल कितनी वित्तीय हानि हुई। जांच एजेंसियां आरोपियों के बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरणों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में बैंक या अन्य संस्थानों से जुड़े और लोग शामिल थे या नहीं।
जांच के दौरान अधिकारियों का ध्यान इस बात पर भी केंद्रित है कि ग्राहकों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची और क्या इस डेटा का इस्तेमाल अन्य साइबर धोखाधड़ी मामलों में भी किया गया। डिजिटल उपकरणों से प्राप्त जानकारी के आधार पर नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों और लेनदेन की कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब हाल ही में दिल्ली पुलिस ने बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से संचालित एक म्यूल बैंक अकाउंट सिंडिकेट का भी भंडाफोड़ किया था। उस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और 248 बैंक खातों के माध्यम से ₹70 करोड़ से अधिक के लेनदेन का पता चला था। जांच में यह भी सामने आया था कि ये खाते देशभर में दर्ज 156 साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़े थे, जिनमें लगभग ₹20 करोड़ की ठगी की शिकायतें दर्ज हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में अंदरूनी जानकारी रखने वाले लोगों की संलिप्तता वाले साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल तकनीकी सुरक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि कर्मचारियों की गतिविधियों की निगरानी, संवेदनशील डेटा तक नियंत्रित पहुंच, बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण और रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम को मजबूत करना भी आवश्यक है। उन्होंने ग्राहकों से अपील की कि वे अपने बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट की नियमित निगरानी करें तथा किसी भी अनधिकृत लेनदेन की तत्काल बैंक और साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां तथा अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
