US$300 मिलियन DeFi हैक के बाद Aave से US$9 अरब की निकासी ने वैश्विक क्रिप्टो बाजार में भरोसे के संकट को गहरा कर दिया

Crypto बाजार में बड़ा झटका: DeFi लेंडिंग प्लेटफॉर्म से US$9 अरब (₹74,700 करोड़) की निकासी, हैकिंग से मचा हड़कंप

Team The420
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नई दिल्ली:  वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी और विकेन्द्रीकृत वित्त (DeFi) बाजार में एक बड़े साइबर हमले के बाद भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। एक सप्ताहांत में हुए हैकिंग हमले में करीब US$300 मिलियन (लगभग ₹24,900 करोड़) की डिजिटल संपत्ति चोरी होने के बाद निवेशकों का भरोसा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस घटना के बाद दुनिया के सबसे बड़े DeFi लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक Aave से लगभग US$9 अरब (करीब ₹74,700 करोड़) की नेट निकासी दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार, हैकर्स ने एक कम चर्चित क्रिप्टो प्रोजेक्ट को निशाना बनाते हुए बड़ी मात्रा में टोकन चुरा लिए। इसके बाद इन टोकनों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर जमा कर क्रेडिट के रूप में उपयोग किया गया, जिससे पूरे सिस्टम में जोखिम की आशंका पैदा हो गई। इस प्रक्रिया ने निवेशकों के बीच घबराहट फैला दी और बड़ी संख्या में यूजर्स ने अपने फंड तुरंत निकालने शुरू कर दिए।

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ब्लॉकचेन सुरक्षा शोधकर्ताओं के अनुसार, हैकर्स ने लगभग US$200 मिलियन मूल्य के चोरी किए गए टोकन को Aave जैसे प्लेटफॉर्म पर कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल किया और इसके बदले अन्य क्रिप्टोकरेंसी उधार ली। इसी तकनीक ने बाजार में यह चिंता बढ़ा दी कि कहीं ये कोलैटरल वास्तविक रूप से सुरक्षित हैं या नहीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना के सामने आने के बाद शनिवार से ही निवेशकों में भारी बेचैनी देखी गई और लगातार निकासी का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ ही दिनों में प्लेटफॉर्म पर कुल लॉक्ड वैल्यू (TVL) में एक तिहाई से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर लगभग US$17.5 अरब तक पहुंच गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना DeFi सेक्टर में मौजूद सुरक्षा कमजोरियों को उजागर करती है, जहां बिना किसी केंद्रीय नियंत्रण के उपयोगकर्ता सीधे लेनदेन, उधार और निवेश करते हैं। इसी कारण ऐसे सिस्टम साइबर हमलों के लिए अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।

ब्लॉकचेन रिसर्चर्स का मानना है कि इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया से जुड़े साइबर अपराधियों का हाथ हो सकता है, क्योंकि हमले की जटिलता और पैमाने उनके पिछले पैटर्न से मेल खाते हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

घटना के बाद संबंधित प्लेटफॉर्म ने कुछ टोकन मार्केट्स को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया है और जांच जारी है। कंपनी ने दावा किया है कि कुछ टोकन पूरी तरह बैक्ड हैं, लेकिन निवेशकों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है।

विश्लेषकों के अनुसार, इस घटना ने क्रिप्टो बाजार में “बैंक रन” जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जहां अफवाहों और अनिश्चितता के कारण लोग एक साथ अपना पैसा निकालने लगते हैं। इससे बाजार में और अधिक अस्थिरता बढ़ जाती है।

इस घटना के बाद वैश्विक क्रिप्टो बाजार में जोखिम प्रबंधन और सुरक्षा ऑडिट को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि DeFi प्लेटफॉर्म्स में कोडिंग कमजोरियां और क्रॉस-चेन ब्रिज जैसी तकनीकें लगातार हैकर्स के निशाने पर रहती हैं। इन ब्रिज के जरिए अलग-अलग ब्लॉकचेन नेटवर्क के बीच संपत्ति का आदान-प्रदान होता है, लेकिन यही संरचना सुरक्षा की दृष्टि से सबसे कमजोर कड़ी मानी जाती है।

साइबर सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे हमलों के बाद हैकर्स अक्सर क्रिप्टो मिक्सर और कई लेयर वाले ट्रांजैक्शन का उपयोग कर फंड को ट्रेस होने से बचाने की कोशिश करते हैं। हालांकि इस बार पैटर्न थोड़ा अलग दिखा, क्योंकि चोरी किए गए टोकन को सीधे कोलैटरल के रूप में उपयोग किया गया, जिससे पूरे DeFi इकोसिस्टम में भरोसे का संकट और गहरा गया।

वहीं, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं का सीधा असर क्रिप्टो कीमतों पर भी पड़ता है, क्योंकि निवेशक जोखिम से बचने के लिए बड़ी मात्रा में एसेट्स को स्टेबल कॉइन्स या फिएट मुद्रा में बदल देते हैं। इससे पूरे डिजिटल एसेट मार्केट में अस्थिरता और बढ़ जाती है।

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