फर्जी सिम कार्ड का बड़ा जाल

साइबर ठगी पर सख्ती: एक लाख से अधिक सिम कार्ड बंद

Roopa
By Roopa
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सरकारी एजेंसियों ने 2023 से अब तक 82 लाख फर्जी कनेक्शन किए निष्क्रिय

कानपुर, संवाददाता — देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) ने 2025 की शुरुआत में अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए एक लाख से अधिक सिम कार्ड बंद कर दिए। इन सिमों का इस्तेमाल ठगी करने वाले गिरोह बड़े पैमाने पर कर रहे थे।

अधिकारियों ने बताया कि ये सिम कार्ड अलग-अलग नामों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए थे। कई ठग एक ही पहचान पर सैकड़ों सिम हासिल कर लेते और उनका इस्तेमाल बैंकिंग धोखाधड़ी, फर्जी कॉल सेंटर और डिजिटल ठगी में करते।

समस्या की गहराई

जांच में सामने आया कि साइबर ठग दूसरों के आधार कार्ड और फोटोग्राफ का दुरुपयोग करके बड़ी संख्या में सिम कार्ड लेते थे। एक ही पहचान पर 200 तक सिम एक्टिवेट कराए गए। इन्हीं नंबरों के ज़रिए भोले-भाले ग्राहकों को झांसा दिया जाता।

डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) और टेलीकॉम एनालिटिक्स फॉर फ्रॉड मैनेजमेंट एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन (TAF-COP) ने लगातार निगरानी कर ऐसे कनेक्शनों को चिन्हित किया।

सरकार की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के लाइसेंस सेवा निदेशक अरुण कुमार वर्मा ने कहा कि विभाग लगातार ब्लॉक किए गए सिम की सूची ऑपरेटरों और एजेंसियों के साथ साझा कर रहा है। “हमारा लक्ष्य फर्जी कनेक्शन पूरी तरह समाप्त करना है। अगर कोई नंबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल होता पाया जाता है, तो उसे तुरंत ब्लॉक किया जाएगा,” वर्मा ने कहा।

Empanelment of Experts in Police Technology by Centre for Police Technology

विशेषज्ञ की राय

साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा:
“सिम आधारित धोखाधड़ी भारत में सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है। फर्जी दस्तावेज़ों और कमजोर सत्यापन प्रक्रिया के कारण अपराधी आसानी से सैकड़ों सिम ले लेते हैं। जब ये सिम संगठित नेटवर्क के हाथों में जाते हैं, तो उनका इस्तेमाल कॉल फ्रॉड, ओटीपी चोरी और ऑनलाइन बैंकिंग ठगी तक में होता है। यह कदम सराहनीय है, लेकिन असली चुनौती पहचान की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और बायोमेट्रिक आधारित बनाने की है। बिना इस सुधार के, ठगी के नए रास्ते हमेशा खुले रहेंगे।”

नई रणनीति

साइबर अपराध रोकने के लिए विभाग ने धोखाधड़ी जोखिम संकेतक प्रणाली विकसित की है। इस प्रणाली से बैंकों, वित्तीय संस्थानों और पुलिस को अलर्ट भेजा जाएगा, ताकि वे समय रहते कार्रवाई कर सकें।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम साइबर अपराध के नेटवर्क को कमजोर करेगा, लेकिन आम नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा—क्योंकि तकनीक जितनी आसान होती है, उसका दुरुपयोग उतना ही तेज़ी से फैलता है।

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