साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक चौंकाने वाले मामले में जांच एजेंसियों ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक जांच शुरू की है। आरोप है कि एक संगठित साइबर ठगी गिरोह ने धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम का इस्तेमाल गोरखपुर के विभिन्न ज्वेलरी शोरूमों से करीब ₹11 करोड़ मूल्य के सोने के आभूषण खरीदने के लिए किया। मामले की जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच की साइबर सेल अब इस नेटवर्क से जुड़े दो प्रमुख संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार गिरोह ने सीधे ठगी की रकम का उपयोग नहीं किया, बल्कि पहले उसे विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया। इसके बाद इन खातों से प्रतिष्ठित ज्वेलरी शोरूमों के बैंक खातों में ऑनलाइन भुगतान किया गया। चूंकि भुगतान समय पर और वैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से पहुंच रहा था, इसलिए दुकानदारों को किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ।
बताया जा रहा है कि भुगतान होने के बाद गिरोह के सदस्य या उनके सहयोगी ज्वेलरी शोरूमों में पहुंचकर सोने के आभूषण प्राप्त कर लेते थे। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित की गई, ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके और अवैध धन को वैध खरीदारी के माध्यम से परिसंपत्तियों में बदला जा सके।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गतिविधि पिछले लगभग तीन महीनों से चल रही थी। गोरखपुर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित कई ज्वेलरी प्रतिष्ठानों से बड़ी मात्रा में खरीदारी किए जाने की जानकारी मिली है। कई मामलों में पहले ऑनलाइन अग्रिम भुगतान किया गया और अगले दिन प्रतिनिधियों को भेजकर आभूषण प्राप्त कर लिए गए। चूंकि बैंक खातों में भुगतान सफलतापूर्वक जमा हो रहा था, इसलिए लेनदेन सामान्य व्यावसायिक गतिविधि जैसा प्रतीत हुआ।
मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने अब तक शहर के कई बड़े ज्वेलरी शोरूमों का दौरा किया है। जांच अधिकारी बिक्री बिल, ग्राहक विवरण, भुगतान रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं। उनका उद्देश्य उन व्यक्तियों की पहचान करना है जिन्होंने आभूषण प्राप्त किए और यह पता लगाना है कि वे किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा थे या नहीं।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि गिरोह ने स्थानीय स्तर पर भी लोगों की मदद ली। जानकारी के अनुसार कुछ युवाओं को कमीशन का लालच देकर नेटवर्क में शामिल किया गया हो सकता है। जांच के दौरान बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। उनके बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और वित्तीय गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी अब केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे धन को वैध दिखाने के लिए जटिल वित्तीय तंत्र का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, “साइबर ठगी से प्राप्त रकम को म्यूल खातों, फर्जी लेनदेन और उच्च मूल्य वाली खरीदारी के माध्यम से वैध रूप देने की कोशिश की जाती है। सोना, लग्जरी सामान और अचल संपत्ति ऐसे मामलों में अपराधियों की पसंदीदा परिसंपत्तियां बनती जा रही हैं क्योंकि इनके माध्यम से धन के स्रोत को छिपाना अपेक्षाकृत आसान होता है।”
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच संबंध लगातार मजबूत होता जा रहा है। उनका कहना है कि वित्तीय संस्थानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से ऐसे नेटवर्कों की पहचान अधिक तेजी से की जा सकती है।
फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे धन प्रवाह, संदिग्ध बैंक खातों, ज्वेलरी खरीदारी से जुड़े दस्तावेजों और संभावित लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों का मानना है कि मामले की गहराई से जांच होने पर साइबर ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित वित्तीय अपराध से जुड़ी कई नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। दो प्रमुख संदिग्धों की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
