मुंबई में CBI ने CGST अधीक्षक समेत तीन लोगों पर ₹15 लाख की कथित रिश्वत लेकर विभागीय जांच प्रभावित करने के आरोप में मामला दर्ज किया।

दातिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को ग्रामीण बैंक धोखाधड़ी में तीन साल की जेल

Team The420
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नई दिल्ली: ग्रामीण विकास बैंक में हुई धोखाधड़ी के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने डाटिया के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को तीन साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले के अन्य दोषी रघुवीर शरण प्रजापति को भी तीन साल कैद और दो लाख पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि कोर्ट ने दोनों दोषियों को दिल्ली उच्च न्यायालय में फैसला चुनौती देने के लिए जमानत दे दी है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में ट्रांसफर किया गया था। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) ने दोनों आरोपियों को धोखाधड़ी, दस्तावेज़ों में जालसाजी, जाली दस्तावेज़ का उपयोग और आपराधिक साजिश के आरोप में दोषी ठहराया। कोर्ट ने राजेंद्र भारती को आपराधिक साजिश के तहत धारा 120बी आईपीसी पढ़कर 420, 467, 478 और 471 के तहत दोषी पाया।

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दूसरे आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को जालसाजी के लिए तीन साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माना, धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए दो साल कैद और 50 हजार रुपये जुर्माना तथा साजिश के लिए तीन साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई।

अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीष रावत ने राज्य की ओर से प्रस्तुत करते हुए दोनों दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की। उन्होंने बताया कि राजेंद्र भारती के खिलाफ अन्य FIR भी दर्ज हैं और वे पहले भी हिरासत में रह चुके हैं। अदालत को बताया गया कि भारती तीन बार विधायक रह चुके हैं और वकील भी हैं।

आरोप का पूरा विवरण

मामला जुलाई 2015 में दर्ज शिकायत से शुरू हुआ। शिकायतकर्ता नरेन्द्र परमार, जो ज़िला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के प्रबंधक थे, ने बताया कि भारती की माता सावित्री श्याम ने अगस्त 1998 में बैंक में 10 लाख रुपये का फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जमा किया था। यह जमा तीन साल की अवधि के लिए 13.5% वार्षिक ब्याज दर पर एक ट्रस्ट ‘श्याम सुंदर श्याम जन सहयोग एवं सामाजिक विकास संस्थान’ के नाम पर किया गया।

शिकायत में आरोप था कि सावित्री ने FD की परिपक्वता पर मिलने वाले ब्याज के बजाय 1999 से 2011 तक हर साल 1.35 लाख रुपये की ब्याज राशि निकालते रहे, यानी कुल 13 साल तक।

बैंक ने यह भी आरोप लगाया कि राजेंद्र भारती ने अपनी प्रभावशाली स्थिति का इस्तेमाल कर बैंक कर्मचारियों पर दबाव डाला और अपनी माता/ट्रस्ट को अनधिकृत भुगतान करने में मदद की, जिससे बैंक को वित्तीय नुकसान हुआ।

इसके अलावा, आरोप है कि आरोपी ब्याज भुगतान अवधि को बढ़ाने के लिए बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर और FD के समय अवधि को जाली दस्तावेज़ों में बदलकर तीन साल की अवधि को दस या पंद्रह साल कर दिया।

शिकायत में यह भी कहा गया कि सावित्री और भारती ने व्यक्तिगत लाभ के लिए बैंक के फंड का गबन करने के लिए साजिश की। दोनों आरोपियों ने FD की मूल अवधि समाप्त होने के बाद भी उच्च ब्याज दर पर पैसे निकालते रहे।

वकील का पक्ष

आरोपी भारती के वकील अभिक चिमनी ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल जनता का विश्वास जीत चुके तीन बार के विधायक हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिस मामले में वे हिरासत में रहे थे, उसमें उन्हें बरी कर दिया गया।

तीसरे आरोपी और भारती की माता सावित्री श्याम का इस बीच निधन हो गया।

न्यायिक निष्कर्ष

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजेंद्र भारती आपराधिक साजिश, जालसाजी और धोखाधड़ी में दोषी हैं और उनकी जिम्मेदारी बैंक को हुए नुकसान की है। अदालत ने सजा सुनाते हुए कहा कि यह मामला सार्वजनिक विश्वास के साथ जुड़े वित्तीय संस्थानों की विश्वसनीयता को चुनौती देता है।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव

यह मामला दर्शाता है कि बैंकिंग और वित्तीय संस्थाओं में उच्च पदों पर बैठे लोग भी धोखाधड़ी और साजिश में शामिल हो सकते हैं। न्यायिक प्रक्रिया ने यह साबित किया कि कानून के समक्ष किसी की राजनीतिक या सामाजिक स्थिति का कोई असर नहीं होता।

भविष्य में बैंकिंग धोखाधड़ी और फंड गबन के मामलों में यह निर्णय मार्गदर्शक साबित होगा। अदालत की कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ सख्त सजा का उद्देश्य अन्य अधिकारियों और नेताओं के लिए चेतावनी देना है।

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