डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर अपराध के बीच एक और ठगी का मामला सामने आया है, जहां कांग्रेस नगर पार्षद उमरानी के पति उलिगड्डाला नगराजू साइबर ठगों के निशाने पर आ गए। सादासिवापेट नगरपालिका क्षेत्र में हुई इस घटना में नगराजू ने फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही अपने खाते से करीब ₹7.79 लाख गंवा दिए। घटना के बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर जांच शुरू कर दी गई है।
फिशिंग लिंक का जाल
जानकारी के अनुसार यह घटना शनिवार रात की बताई जा रही है। नगराजू को एक अज्ञात नंबर से संदेश प्राप्त हुआ था, जिसमें किसी ऑफर या जरूरी सूचना का हवाला देकर एक लिंक भेजा गया था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि लिंक संभवतः फिशिंग गतिविधि का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य उपयोगकर्ता की बैंकिंग जानकारी हासिल करना था।
बताया जाता है कि लिंक पर क्लिक करने के बाद नगराजू के मोबाइल में एक संदिग्ध पेज खुला, जिसके बाद उनके खाते से अलग-अलग चरणों में राशि ट्रांसफर होने लगी। जब तक उन्हें धोखाधड़ी का अंदेशा हुआ, तब तक ठग बड़ी रकम निकाल चुके थे। घटना के बाद उन्होंने तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क किया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की तकनीकी जांच की जा रही है। जिस मोबाइल नंबर और लिंक के माध्यम से संपर्क किया गया था, उसकी ट्रेसिंग शुरू कर दी गई है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी की रकम किस खाते में ट्रांसफर हुई और क्या यह किसी संगठित साइबर गिरोह का हिस्सा है।
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साइबर ठगों की सोशल इंजीनियरिंग तकनीक और पुलिस अपील
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में ठग आमतौर पर सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। वे लोगों को भरोसे में लेने के लिए सरकारी या बैंकिंग संस्थान जैसी पहचान का उपयोग करते हैं और फिर फर्जी लिंक के जरिए व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी चुरा लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर जब संदेश की प्रामाणिकता स्पष्ट न हो।
स्थानीय नागरिकों के बीच भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध संदेश, कॉल या लिंक पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें और अनजान स्रोतों से आए लिंक को खोलने से बचें।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ठगों ने संभवतः फर्जी पहचान का उपयोग कर नगराजू से संपर्क किया। पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन डेटा और मोबाइल नेटवर्क जानकारी की मदद से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
इस बीच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल ठगी के मामलों में जागरूकता सबसे प्रभावी बचाव है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने बैंक खाते की सुरक्षा सेटिंग मजबूत रखें, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध वित्तीय प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले सत्यापन जरूर करें।
घटना के बाद इलाके में साइबर सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही दोषियों की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा।
