नई दिल्ली: केरल में Cochin Minerals and Rutile Limited (CMRL) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा दावा किया है। एजेंसी के मुताबिक, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी टी. वीणा से जुड़े परिसरों की तलाशी के दौरान ऐसे हस्तलिखित नोट्स बरामद हुए हैं, जिनमें दुबई भेजी गई कथित ₹85 लाख की रकम का उल्लेख है। ED का कहना है कि इन नोट्स में कई लोगों के नाम, उनके जरिए संभाली गई रकम और खर्च का विवरण भी दर्ज है। एजेंसी ने इसे मामले में कथित वित्तीय लेनदेन और हवाला नेटवर्क से जोड़कर देखा है।
ED के अनुसार, 27 मई 2026 को वीणा और CMRL के प्रमोटरों से जुड़े परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया था। इसी कार्रवाई के दौरान कथित हस्तलिखित खाते और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए। एजेंसी का दावा है कि वीणा CMRL से कथित तौर पर बिना वास्तविक सेवाएं दिए भुगतान हासिल करने वालों में शामिल थीं। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों में दर्ज रकम कथित तौर पर CMRL से उन्हें मिले भुगतान से अधिक थी।
जांच एजेंसी ने कहा कि हस्तलिखित खातों में जिन लोगों के नाम सामने आए, उनके परिसरों को भी तलाशी के दायरे में लिया गया। इसके अलावा, उस व्यक्ति से जुड़े स्थान पर भी कार्रवाई की गई, जिसके नाम पर कथित तौर पर SIM कार्ड हासिल किया गया था। ED के मुताबिक, वीणा से जब्त डिजिटल उपकरणों में एक SIM कार्ड की तस्वीर मिली। यह SIM किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी कराया गया था और कथित तौर पर Wi-Fi राउटर में इस्तेमाल किया जा रहा था।
ED को संदेह है कि SIM कार्ड और Wi-Fi राउटर का इस्तेमाल इंटरनेट आधारित कॉल के लिए किया जाता था। एजेंसी ने जांच में रकम को हवाला चैनलों के जरिए स्थानांतरित किए जाने से संबंधित साक्ष्य मिलने का भी दावा किया है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि अदालत में अंतिम रूप से होना बाकी है। ED के मुताबिक, बरामद दस्तावेज और डिजिटल सामग्री इस बात की ओर संकेत करते हैं कि वीणा कथित तौर पर अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक रकम का प्रबंधन कर रही थीं।
यह पूरा मामला CMRL से जुड़े कथित कॉरपोरेट फ्रॉड और रिश्वत भुगतान की जांच से जुड़ा है। ED ने कहा कि उसने Serious Fraud Investigation Office (SFIO) की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर Prevention of Money Laundering Act, 2002 के तहत जांच शुरू की। SFIO के निष्कर्षों के मुताबिक, CMRL ने करीब 15 वर्षों की अवधि में कथित तौर पर ₹182 करोड़ के फर्जी नकद खर्च दर्ज किए थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन खर्चों का इस्तेमाल विभिन्न लोगों को कथित रूप से रिश्वत देने के लिए किया गया।
ED के मुताबिक, CMRL के कथित फर्जी खर्चों में वीणा की कंपनी Exalogic Solutions Private Limited को किया गया भुगतान भी शामिल था। कंपनी अब बंद हो चुकी है। SFIO के आरोपों के अनुसार, Exalogic को IT consultancy services के नाम पर CMRL से कुल ₹2.78 करोड़ का कथित भुगतान किया गया था। इसके अलावा, CMRL के प्रबंध निदेशक ससीधरन कार्था द्वारा संचालित Empower India Capital Investment Private Limited ने Exalogic को कुल ₹50 लाख के ऋण दिए थे। SFIO ने आरोप लगाया था कि कंपनी समय पर इन ऋणों का भुगतान करने में विफल रही थी।
मामले की जांच में ED ने हाल के दिनों में भी कार्रवाई तेज की है। एजेंसी ने 18 अगस्त को केरल के कोझिकोड में नौ परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई कथित कॉरपोरेट फ्रॉड और CMRL से जुड़े रिश्वत भुगतान की जांच के तहत की गई थी। एजेंसी अब तक बरामद दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर कथित रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
ED के ताजा दावों के बाद केरल की राजनीति में भी मामला गरमा गया है। केरल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने ED की ओर से वीणा के खिलाफ कथित आपत्तिजनक वित्तीय साक्ष्य मिलने के दावे को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि यदि जांच में मौद्रिक लेनदेन से जुड़े तथ्य सामने आए हैं, तो मामले पर CPI(M) की ओर से दिए गए तर्कों पर जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने पिनराई विजयन और CPI(M) से इस मामले पर स्पष्टीकरण की मांग की।
फिलहाल, ₹85 लाख के कथित दुबई ट्रांसफर, हस्तलिखित नोट्स और हवाला चैनल से जुड़े दावे ED की जांच के निष्कर्षों पर आधारित हैं। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के परिणामों पर निर्भर करेगी।
