दोषियों के यूरोप में निवेशित संपत्तियों और फंडों की वसूली का फैसला; ₹3,417 करोड़ के नुकसान की भरपाई

वैश्विक वित्तीय धोखाधड़ी पर कड़ी कार्रवाई: चीन ने फर्जी सोने के ऋण मामले में विदेश में संपत्ति जब्त की

Roopa
By Roopa
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शांक्सी, चीन: चीन के शांक्सी प्रांत की वेनान इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामले में फैसला सुनाते हुए दोषियों की विदेशी संपत्तियों और बैंक खातों पर जब्ती का आदेश दिया। यह मामला 2011 से 2016 तक चलने वाले फर्जी सोने के आधार पर ऋण लेने के घोटाले से संबंधित है, जिसमें कुल हानि लगभग ₹3,417 करोड़ ($391 मिलियन) दर्ज की गई।

कोर्ट ने जंग चिंगमिन और जंग शुमिन के खिलाफ आदेश दिया कि उनके द्वारा साइप्रस में खरीदी गई 17 संपत्तियों को जब्त किया जाए। इसके साथ ही, सात बैंक खातों में रखे गए फंड और संबंधित ब्याज भी वसूले जाएंगे और धोखाधड़ी से प्रभावित संस्थाओं को लौटाए जाएंगे।

कोर्ट के बयान के अनुसार, जंग चिंगमिन और अन्य आरोपियों ने अपने बनाए फर्जी सोने का इस्तेमाल किया, जिसे टंगस्टन के साथ मिलाया गया था, और चार वित्तीय संस्थानों से सोने के आधार पर ऋण प्राप्त किया। इन ऋणों के माध्यम से धोखाधड़ी की गई रकम ने कई वित्तीय संस्थाओं और निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया।

घोटाले की जांच में पाया गया कि फर्जी सोना अत्यंत सटीक तरीके से बनाया गया था, जिससे प्रारंभिक निरीक्षण में इसे असली सोने के रूप में पहचाना गया। धोखाधड़ी के दौरान जटिल लेन-देन और अंतरराज्यीय वित्तीय नेटवर्क का उपयोग किया गया, जिससे धोखाधड़ी की पहचान और वसूली प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण बन गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी सोने पर आधारित इस प्रकार के ऋण धोखाधड़ी मामले वैश्विक वित्तीय नियंत्रण और पारदर्शिता के लिए चेतावनी का संकेत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विदेशी संपत्तियों की निगरानी आवश्यक है, ताकि दोषियों द्वारा विदेश में जमा की गई संपत्तियों का समय पर नियंत्रण किया जा सके।

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कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि दोषियों द्वारा अर्जित लाभ और विदेशी निवेश को जब्त करना न्यायिक प्रणाली की सख्ती और धोखाधड़ी रोकने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इसके साथ ही, वित्तीय संस्थाओं और निवेशकों को सतर्क रहने और उचित जाँच-पड़ताल के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

अदालत ने यह भी बताया कि ₹3,417 करोड़ की हानि केवल स्थानीय वित्तीय संस्थाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि इससे जुड़े ऋण और निवेशों का असर व्यापक था। इसलिए विदेशी संपत्तियों की जब्ती और बैंक खातों में फंसे फंड की वसूली को प्राथमिकता दी गई।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बड़े पैमाने के धोखाधड़ी मामले यह संकेत देते हैं कि वित्तीय संस्थाओं को न केवल आंतरिक नियंत्रण बढ़ाने की आवश्यकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और डेटा साझा करने की भी जरूरत है। साथ ही, धोखाधड़ी की प्रवृत्ति को पहचानने और रोकने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोणों का इस्तेमाल करना भी महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष- वेनान इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट का यह निर्णय चीन में वित्तीय धोखाधड़ी पर कड़ी कार्रवाई और न्याय प्रणाली की पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। दोषियों की विदेशी संपत्तियों पर जब्ती से न केवल प्रभावित संस्थाओं की हानि की वसूली होगी, बल्कि यह वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अनुशासन और जवाबदेही की मिसाल भी स्थापित करेगा।

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