रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला लेवी घोटाले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में निलंबित IAS अधिकारी समीर विश्नोई की करीब ₹4 करोड़ की संपत्तियों को अटैच किया गया है। यह कार्रवाई कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में की गई है, जिससे इस बहुचर्चित घोटाले की परतें और गहराती नजर आ रही हैं।
जांच के दौरान सामने आया कि विश्नोई ने अपने परिजनों और कुछ संबद्ध फर्मों के नाम पर कई अचल संपत्तियां खरीदी थीं। इन संपत्तियों को अवैध कमाई से जोड़ा जा रहा है। कुल 9 अचल संपत्तियों की पहचान की गई, जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹4 करोड़ बताई जा रही है। विशेष अदालत में आवेदन के बाद इन संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया गया, जिसके बाद संबंधित विभाग ने इन्हें जब्त कर लिया। अब इन संपत्तियों की खरीद-फरोख्त या हस्तांतरण पर पूरी तरह रोक लग गई है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
यह पहला मामला नहीं है जब विश्नोई से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई हुई हो। इससे पहले भी प्रवर्तन से जुड़े अधिकारियों ने इसी घोटाले के सिलसिले में उनकी 5 अन्य अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह संकेत मिल रहा है कि जांच एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं और घोटाले से जुड़े आर्थिक नेटवर्क को पूरी तरह उजागर करने में जुटी हैं।
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₹540 करोड़ के कथित रैकेट का मामला
यह पूरा मामला जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच सक्रिय रहे एक कथित कोयला लेवी रैकेट से जुड़ा है। आरोप है कि इस दौरान कोयले के हर टन परिवहन पर ₹25 की अवैध वसूली की जाती थी। इस तरह से करीब ₹540 करोड़ का बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया, जिसमें कथित तौर पर कई प्रभावशाली लोग, कारोबारी और बिचौलिए शामिल थे।
जांच एजेंसियों का दावा है कि यह कोई सामान्य भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि संगठित तरीके से संचालित किया गया एक बड़ा आर्थिक घोटाला है। इसमें सरकारी पदों का दुरुपयोग कर अवैध कमाई की गई और उसे विभिन्न माध्यमों से संपत्तियों में बदला गया।
2022 में हुई थी गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
समीर विश्नोई को इस मामले में वर्ष 2022 में गिरफ्तार किया गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद उनके खिलाफ जांच जारी रही और अब आय से अधिक संपत्ति के मामले में नए सिरे से शिकंजा कसता नजर आ रहा है।
अन्य आरोपियों पर भी नजर
इस घोटाले में सिर्फ एक अधिकारी ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इनमें पूर्व पदों पर रह चुके कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं। पिछले वर्ष सितंबर में भी एक अन्य आरोपी से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी, जिससे संकेत मिलता है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
जांच का अगला चरण अहम
मामले की जांच अब ऐसे चरण में पहुंच चुकी है, जहां एजेंसियां न केवल संपत्तियों की पहचान कर रही हैं, बल्कि यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अवैध धन का प्रवाह किन-किन चैनलों से हुआ। डिजिटल ट्रांजैक्शन, फर्जी कंपनियों और बेनामी संपत्तियों की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में और संपत्तियों या नए नाम सामने आते हैं, तो कार्रवाई का दायरा और व्यापक हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी तंत्र के भीतर भ्रष्टाचार किस हद तक जड़ें जमा सकता है। फिलहाल सभी की नजरें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जो इस बहुचर्चित कोयला घोटाले की दिशा तय कर सकती है।
