चेन्नई: सरकारी उपक्रम के नाम पर फर्जी टेंडर जारी होने का झांसा देकर करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट का लालच दिखाने और सुरक्षा जमा (Security Deposit) के नाम पर ₹12.70 लाख की साइबर ठगी करने के मामले में ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने तेलंगाना से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कथित तौर पर अपना बैंक खाता ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए उपलब्ध कराया और बाद में राशि मुख्य आरोपी तक पहुंचाने के बदले कमीशन भी लिया। पुलिस अब पूरे नेटवर्क, मुख्य साजिशकर्ता और धन के प्रवाह की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता 35 वर्षीय कारोबारी जयंती बाबू चेन्नई के वानगरम स्थित कृष्णा इंडस्ट्रियल एस्टेट के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि 11 मार्च 2026 को उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को भारतीय ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) से जुड़ा बताते हुए दावा किया कि कंपनी ऑटोमैटिक डोर लगाने के लिए लगभग ₹4 करोड़ का टेंडर जारी करने वाली है।
आरोप है कि ठग ने शिकायतकर्ता को विश्वास दिलाया कि टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सुरक्षा जमा राशि जमा करना अनिवार्य है। सरकारी परियोजना में बड़ा कारोबार मिलने की उम्मीद में शिकायतकर्ता ने आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खाते में अलग-अलग किस्तों में कुल ₹12.70 लाख ट्रांसफर कर दिए। रकम मिलने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया। खुद को ठगा महसूस होने पर पीड़ित ने पश्चिम जोन साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद पश्चिम जोन साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी विश्लेषण और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के दौरान पुलिस ने उस बैंक खाते का पता लगाया, जिसमें ठगी की राशि भेजी गई थी। जांच में यह खाता तेलंगाना के मोइनाबाद क्षेत्र के मेडिपल्ली गांव निवासी 33 वर्षीय मोहिलिकिट्टा महेश के नाम पर मिला।
इसके बाद चेन्नई पुलिस की एक विशेष टीम तेलंगाना पहुंची और स्थानीय मोइनाबाद पुलिस की सहायता से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे चेन्नई लाया गया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी ऑनलाइन सर्विस से जुड़ा कारोबार संचालित करता था। आरोप है कि उसने मुख्य ठग के साथ मिलकर साजिश रची और अपना बैंक खाता ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए उपलब्ध कराया। जांच एजेंसियों के अनुसार, खाते में राशि आने के बाद उसने धन मुख्य आरोपी को स्थानांतरित कर दिया और बदले में लगभग ₹2.75 लाख कमीशन प्राप्त किया।
जांच अधिकारी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस बैंक खाते का इस्तेमाल केवल इसी वारदात में हुआ या अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों में भी किया गया। मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन, डिजिटल संचार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के जरिए पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश की जा रही है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कंपनियों के नाम पर फर्जी टेंडर, ई-प्रोक्योरमेंट और सप्लाई ऑर्डर से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ठग प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के नाम, नकली ईमेल, फर्जी दस्तावेज और सुरक्षा जमा राशि की मांग का सहारा लेकर कारोबारियों को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी भुगतान से पहले संबंधित सरकारी विभाग या सार्वजनिक उपक्रम की आधिकारिक वेबसाइट पर टेंडर की पुष्टि करना और केवल अधिकृत पोर्टल के माध्यम से ही आवेदन करना जरूरी है।
पुलिस ने कहा कि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है और उसके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल थे, ठगी की रकम किन खातों में भेजी गई तथा क्या इसी तरीके से अन्य राज्यों के कारोबारियों को भी निशाना बनाया गया। जांच पूरी होने के बाद मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
