ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक एटा में तैनात अधिकारी ने मरीज रेफर करने के नाम पर ली रिश्वत, नोएडा के फेलिक्स अस्पताल का एजीएम भी गिरफ्तार

तीन लाख रुपये रिश्वत लेते मेडिकल ऑफिसर पकड़ा गया

Team The420
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गाजियाबाद। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने गाजियाबाद में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक एटा में तैनात सेवानिवृत्त मेडिकल ऑफिसर, मेजर डॉ. आशीष शाक्य को तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इस मामले में नोएडा स्थित फेलिक्स अस्पताल के एजीएम मार्केटिंग बिजेंद्र सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के अनुसार, 15 मार्च को प्राप्त सूचना के आधार पर CBI ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि डॉ. शाक्य ने फेलिक्स अस्पताल के अधिकारियों सुमित गुप्ता, रोहित अग्रवाल और बिजेंद्र सिंह के साथ मिलकर मरीजों को बिना वास्तविक मेडिकल जरूरत के अस्पताल में रेफर करने का साजिश रचा। इसके बदले वह उनसे नियमित रूप से रिश्वत लेते थे।

CBI के मुताबिक, 11 मार्च को डॉ. शाक्य ने सुमित गुप्ता से बातचीत की और लंबित रिश्वत की रकम जल्द देने को कहा। इसके बाद 14 मार्च को नोएडा में मुलाकात तय हुई, जिसमें डॉ. शाक्य को भुगतान की व्यवस्था समझाई गई। जांच टीम ने 15 मार्च को फेलिक्स अस्पताल के सेक्टर-137 स्थित कॉन्फ्रेंस रूम में कार्रवाई की। यहां डॉ. शाक्य को बिजेंद्र सिंह से तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया।

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संपर्क सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाक्य ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मरीजों को अपने विवेक के बजाय विशेष अस्पताल में भेजने की प्रथा बना ली थी। वह मरीजों की सुरक्षा और इलाज की जरूरत की अनदेखी करते हुए केवल आर्थिक लाभ के लिए रेफरिंग का काम कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की भ्रष्टाचार की घटनाएं स्वास्थ्य प्रणाली में विश्वास को प्रभावित करती हैं और मरीजों के हितों के विपरीत होती हैं।

गिरफ्तारी के बाद CBI ने आरोपियों के बैंक खाते और लेन-देन का विवरण जुटाना शुरू कर दिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साजिश में और कितने लोग शामिल थे और कितनी रकम का लेन-देन किया गया। अधिकारियों ने कहा कि जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मरीजों को फेलिक्स अस्पताल में रेफर करने के पीछे कितने समय से यह प्रथा चल रही थी और क्या इस नेटवर्क में अन्य मेडिकल अधिकारी भी शामिल थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार का यह मामला चेतावनी है कि पद का दुरुपयोग मरीजों की सुरक्षा और वित्तीय हितों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को रेफरिंग प्रक्रिया की निगरानी कड़ाई से करनी चाहिए और किसी भी अनियमित गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

CBI ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी अस्पताल या मेडिकल अधिकारी द्वारा अवैध लाभ के लिए दबाव डाला जाता है, तो तुरंत सूचना दें। अधिकारियों ने कहा कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, और इस मामले में आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि डॉ. शाक्य की गिरफ्तारी से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी और अर्ध-सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कार्रवाई से अन्य अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ेगी और मरीजों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

CBI के सूत्रों ने कहा कि अभी और जांच की जा रही है ताकि इस साजिश में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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