बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में पुलिस ने फर्जी फर्मों के जरिए ₹1.21 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी कंपनियां बनाकर और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल कर वर्ष 2025-26 के दौरान सरकार को ₹1,21,85,878.36 के राजस्व का नुकसान पहुंचाया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई थाना ककोड़ पुलिस, साइबर क्राइम सेल और विशेष जांच दल (SIT) की संयुक्त टीम ने सोमवार को गाजियाबाद में की। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपा रघुवंशी, समर चौधरी और सुरेंद्र के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि तीनों कथित तौर पर फर्जी फर्मों के संचालन और कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से जीएसटी चोरी के पूरे नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने काल्पनिक या फर्जी व्यावसायिक संस्थानों के नाम पर दस्तावेज तैयार कर जीएसटी प्रणाली का दुरुपयोग किया। इन फर्मों के माध्यम से कथित तौर पर ऐसे वित्तीय लेनदेन दर्शाए गए, जिनके आधार पर सरकार को करोड़ों रुपये के कर राजस्व का नुकसान हुआ। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में अन्य लोग या कंपनियां भी शामिल थीं या नहीं।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, दो एप्पल मोबाइल फोन, एक मोबाइल फोन का डिब्बा तथा संबंधित बिल बरामद किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाएंगे। पुलिस को उम्मीद है कि इनसे फर्जी फर्मों के संचालन, दस्तावेज तैयार करने और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने फर्जी फर्मों के जरिए जीएसटी चोरी की पूरी साजिश को अंजाम दिया। हालांकि पुलिस इस कथित स्वीकारोक्ति के साथ-साथ दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों का भी मिलान कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। जांच एजेंसियां बैंक खातों, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, वित्तीय लेनदेन और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं।
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इस मामले में थाना ककोड़ में मुकदमा अपराध संख्या 471/2025 दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के अलावा आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत धोखाधड़ी, कूटरचना, पहचान संबंधी अपराध और कंप्यूटर संसाधनों के दुरुपयोग जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।
गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी फर्मों का नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था तथा इसके माध्यम से कुल कितनी कर चोरी की गई। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस गिरोह ने अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार की फर्जी कंपनियां बनाकर जीएसटी प्रणाली का दुरुपयोग तो नहीं किया।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि वित्तीय अपराधों में अब फर्जी दस्तावेज, डिजिटल पहचान और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में डिजिटल फॉरेंसिक, बैंकिंग रिकॉर्ड, जीएसटी डेटा और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की वैज्ञानिक जांच से पूरे नेटवर्क तक पहुंचना संभव होता है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फर्जी फर्मों और डिजिटल दस्तावेजों के दुरुपयोग पर सख्त निगरानी तथा त्वरित कार्रवाई बेहद आवश्यक है।
पुलिस ने कहा कि मामले से जुड़े सभी वित्तीय और डिजिटल पहलुओं की गहन जांच जारी है। यदि जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों, कंपनियों या सहयोगियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कर चोरी और आर्थिक अपराधों में शामिल संगठित नेटवर्क के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
