बुलंदशहर में फर्जी कंपनियां बनाकर कथित ₹1.21 करोड़ GST चोरी करने वाले गिरोह की महिला समेत तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

₹1.21 करोड़ की GST चोरी का भंडाफोड़: फर्जी कंपनियां बनाकर टैक्स चोरी करने वाले गिरोह की महिला समेत तीन सदस्य गिरफ्तार

Team The420
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बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कंपनियां बनाकर ₹1.21 करोड़ से अधिक की GST चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। थाना ककोड़ पुलिस, विशेष जांच दल (SIT) और साइबर क्राइम टीम की संयुक्त कार्रवाई में गाजियाबाद से एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के अनुसार गिरोह ने कागजों पर फर्जी कंपनियां तैयार कर वर्ष 2025-26 के दौरान सरकार को ₹1,21,85,878.36 के राजस्व का नुकसान पहुंचाया।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपा रघुवंशी, समर चौधरी और सुरेंद्र के रूप में हुई है। तीनों गाजियाबाद के निवासी हैं और लंबे समय से फर्जी फर्मों के जरिए कर चोरी और आर्थिक अपराधों में शामिल होने का आरोप है। पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके और उससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी कूटरचित पहचान पत्र, फर्जी पते और अन्य जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कागजों पर कंपनियां पंजीकृत कराते थे। इन फर्जी फर्मों के माध्यम से कथित तौर पर GST से संबंधित लेनदेन दिखाए जाते थे, जिससे कर देनदारी से बचते हुए सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितनी अन्य फर्जी कंपनियां जुड़ी हुई थीं और उनके माध्यम से कितने समय से यह गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

यह मामला पहले भी पुलिस के संज्ञान में आ चुका था। इसी प्रकरण में 23 जनवरी 2026 को एक महिला सहित तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और डिजिटल जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए 27 जुलाई 2026 को तीन और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अपराध में इस्तेमाल किया गया एक लैपटॉप, दो एप्पल मोबाइल फोन और एक मोबाइल फोन का डिब्बा बिल सहित बरामद किया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग फर्जी कंपनियों के संचालन, दस्तावेज तैयार करने, डिजिटल रिकॉर्ड रखने और वित्तीय लेनदेन से संबंधित गतिविधियों में किया जाता था। जब्त किए गए उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस अब बैंक खातों, GST पंजीकरण रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस कथित कर चोरी में अन्य व्यक्तियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, बिचौलियों या कारोबारी संस्थाओं की भी भूमिका रही है। यदि जांच में अतिरिक्त साक्ष्य मिलते हैं तो मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

आर्थिक अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी कंपनियों के जरिए GST चोरी संगठित वित्तीय अपराध का एक गंभीर रूप है। ऐसे मामलों में डिजिटल दस्तावेजों का सत्यापन, लाभार्थी खातों की जांच, संदिग्ध लेनदेन की निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई से पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सकता है। समय-समय पर डेटा विश्लेषण और जोखिम आधारित ऑडिट भी इस प्रकार की कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। मामले में थाना ककोड़ में पहले से दर्ज मुकदमे के आधार पर आगे की जांच जारी है। जांच एजेंसियां गिरोह के अन्य सदस्यों, संभावित सहयोगियों और कर चोरी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक अपराध और कर चोरी में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा तथा जांच में सामने आने वाले सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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