नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव और इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। एक साक्षात्कार में गेट्स से जब पूछा गया कि क्या एआई के कारण मानवता के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि गलत नीयत वाले लोगों द्वारा इसका दुरुपयोग किए जाने पर एआई ऐसी घटनाओं को जन्म देने में सक्षम हो सकता है, जिनमें एक अरब लोगों की मौत तक हो सकती है।
गेट्स की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब एआई के तेजी से विकसित होते स्वरूप और इसके स्वायत्त इस्तेमाल को लेकर तकनीकी क्षेत्र में बहस तेज है। उन्होंने कहा कि एआई निश्चित रूप से इतना शक्तिशाली हो सकता है कि बुरी नीयत रखने वाले लोग इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर विनाशकारी घटनाओं को अंजाम देने के लिए कर सकें। उनके अनुसार, बुरी नीयत वाले लोगों और नवीनतम एआई उपकरणों का संयोजन अब तक सामने आए हथियारों और तकनीकों के मुकाबले अलग स्तर का खतरा पैदा कर सकता है।
गेट्स से यह सवाल उस चर्चा के संदर्भ में किया गया था, जिसमें कुछ एआई शोधकर्ताओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने आशंका जताई है कि अत्यधिक सक्षम एआई भविष्य में मानव नियंत्रण से बाहर जा सकता है। गेट्स ने इस संभावना को सीधे मानवता के पूर्ण विनाश के रूप में पेश करने के बजाय एआई के दुरुपयोग से होने वाले बड़े पैमाने के नुकसान की क्षमता पर जोर दिया।
एआई सुरक्षा को लेकर चिंता जताने वाले गेट्स अकेले प्रमुख तकनीकी क्षेत्र के व्यक्ति नहीं हैं। एंथ्रोपिक के शोधकर्ता इवान ह्यूबिंगर ने भी एआई से मानव अस्तित्व को होने वाले संभावित खतरे पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है। वहीं, एंथ्रोपिक से जुड़े पूर्व शोधकर्ता जैकब कॉक्सन ने कंपनी छोड़ते समय एआई विकास से जुड़े जोखिमों को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। कॉक्सन ने एआई कंपनियों द्वारा सुरक्षा और मानवता के भविष्य से जुड़े जोखिमों को लेकर अपनाए जा रहे दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई थी।
मानवता के अस्तित्व के लिए एआई के खतरे की चर्चा नई नहीं है। ब्रिटिश दार्शनिक निक बोस्ट्रॉम ने 2014 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘सुपरइंटेलिजेंस’ में ऐसी परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की थी, जिनमें मानव से अधिक सक्षम एआई को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इसके बाद एआई सुरक्षा और जोखिम को लेकर शोधकर्ताओं के बीच यह विषय लगातार चर्चा में रहा है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख एआई शोधकर्ताओं ने भी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सार्वजनिक किया है। 2024 में ओपनएआई से जुड़े रहे जान लाइके और डेनियल कोकोटाज्लो ने एआई सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताओं के बीच कंपनी छोड़ी थी। इसके बाद एआई प्रणालियों के तेजी से विकास और सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन को लेकर बहस और तेज हुई।
एआई के संभावित सैन्य इस्तेमाल को लेकर भी इसी तरह के सवाल उठते रहे हैं। विशेष रूप से स्वायत्त हथियार प्रणालियों, निगरानी तकनीक और ऐसे एआई मॉडल के इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई है, जिनका इस्तेमाल मनुष्यों के सीधे नियंत्रण के बिना निर्णय लेने में किया जा सकता है।
2023 में ओपनएआई, एंथ्रोपिक और गूगल डीपमाइंड के प्रमुखों समेत एआई क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने एक सार्वजनिक बयान में एआई से मानवता के अस्तित्व को होने वाले जोखिम को वैश्विक स्तर के अन्य गंभीर खतरों के साथ चर्चा में रखने की बात कही थी। इसमें महामारी और परमाणु युद्ध जैसे खतरों के समान एआई से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
हालांकि, एआई के भविष्य को लेकर विशेषज्ञों के बीच जोखिम की प्रकृति और उसकी संभावना पर अलग-अलग मत हैं। कुछ शोधकर्ता तत्काल सुरक्षा जोखिमों, गलत सूचना और दुरुपयोग पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि कुछ का जोर अत्यधिक सक्षम एआई के दीर्घकालिक प्रभावों पर है। गेट्स की ताजा टिप्पणी इसी व्यापक बहस के बीच आई है और इसमें मुख्य चिंता एआई की क्षमता से अधिक उसके गलत हाथों में इस्तेमाल होने को लेकर है।
एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब तकनीकी कंपनियों और सरकारों के सामने यह सवाल महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि शक्तिशाली एआई प्रणालियों को किस तरह विकसित और नियंत्रित किया जाए, ताकि उनके लाभ का इस्तेमाल बढ़ाया जा सके और संभावित दुरुपयोग से बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान को सीमित किया जा सके।
