भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के बाद भंग हुआ संगठित रैकेट, उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूलकर ब्लूटूथ, लैपटॉप और प्रिंटर के जरिए नकल कराने की साजिश का खुलासा

परीक्षा में ‘हाई-टेक नकल गैंग’ का भंडाफोड़: इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से कॉन्स्टेबल एग्जाम पास कराने का खेल, STF ने 3 आरोपियों को दबोचा

Roopa
By Roopa
4 Min Read

पटना/भागलपुर। बिहार पुलिस प्रोहिबिशन कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान सामने आई अनियमितताओं और तकनीकी गड़बड़ियों के बीच एक संगठित नकल गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य में चल रही इस परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश में शामिल एक हाई-टेक रैकेट को बिहार एसटीएफ और भागलपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में भंडाफोड़ किया गया है। छापेमारी के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान खगड़िया निवासी कुंदन कुमार उर्फ देवमुनि उर्फ देव सर, नवगछिया निवासी देव कुमार और सहरसा निवासी दिलीप कुमार के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से परीक्षा में पास कराने के नाम पर उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूल रहा था और तकनीकी उपकरणों की मदद से नकल कराने की योजना तैयार करता था।

सूत्रों के अनुसार, गिरोह के सदस्य परीक्षा से पहले ही अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें भरोसा दिलाते थे कि वे इलेक्ट्रॉनिक साधनों और सेटअप के जरिए परीक्षा में सफलता सुनिश्चित करा सकते हैं। इसके लिए उम्मीदवारों से बड़ी रकम ली जाती थी और उन्हें विशेष उपकरण उपलब्ध कराने की बात कही जाती थी, जिससे परीक्षा केंद्रों पर उत्तर भेजे और प्राप्त किए जा सकें।

छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं, जिनमें दो लैपटॉप, कीबोर्ड, माउस, लैपटॉप चार्जर, प्रिंटर, राउटर, सात मोबाइल प्रिंटर, एक आईपैड, वॉकी-टॉकी, ब्लूटूथ डिवाइस, 10 डेबिट कार्ड और पांच मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनमें एडमिट कार्ड, मार्कशीट, मूल प्रमाणपत्र और परीक्षा से जुड़े अन्य कागजात शामिल हैं।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह गिरोह तकनीकी रूप से काफी संगठित था और परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने के लिए आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करता था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि अभ्यर्थियों के चयन को प्रभावित करने के लिए एक नेटवर्क के तहत काम किया जा रहा था, जिसमें कई राज्यों से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं।

इस कार्रवाई के बाद परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों को लेकर प्रशासन भी सतर्क हो गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने कितने उम्मीदवारों को प्रभावित किया और कितनी परीक्षाओं में हस्तक्षेप किया गया।

जांच टीम अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह के पीछे और कौन-कौन लोग सक्रिय थे और क्या यह किसी बड़े संगठित परीक्षा माफिया का हिस्सा है।

इस खुलासे के बाद परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी को लेकर भी नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे मामलों में और गिरफ्तारियां संभव हैं, क्योंकि जांच में कई नए सुराग मिल रहे हैं।

फिलहाल, तीनों गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ जारी है और पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए विभिन्न स्तरों पर जांच तेज कर दी गई है।

हमसे जुड़ें

Share This Article