पटना। बिहार के मधुबनी जिले में एक मदरसा शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद कथित आतंकी मॉड्यूल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी शिक्षक पर युवाओं के पासपोर्ट बनवाने और उन्हें नेपाल के रास्ते पाकिस्तान तक भेजने वाले नेटवर्क से जोड़ने की भूमिका निभाने का आरोप है। यह मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार शिक्षक मौलाना इज़हार-उल-हक मधुबनी के एक स्थानीय मदरसे में कार्यरत था। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह बिहार के कई जिलों से युवाओं की भर्ती करने में शामिल था। इन युवाओं को पहले नेपाल ले जाने और फिर वहां से पाकिस्तान भेजने की योजना बनाई जा रही थी। अधिकारियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क एक संगठित क्रॉस-बॉर्डर मॉड्यूल का हिस्सा हो सकता है।
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जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में दो अन्य लोगों की भूमिका भी संदिग्ध है—नएम अब्दुल्ला (देवबंद) और फराज़ उर्फ खालिद सैफुल्लाह (भोपाल)। आरोप है कि इन दोनों को पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स द्वारा अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं, ताकि पूरे नेटवर्क को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर संचालित किया जा सके।
एजेंसियों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब मध्य प्रदेश और बिहार की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने संयुक्त रूप से तकनीकी निगरानी शुरू की। इसके बाद कई अहम सुराग मिले, जिसके आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के बाद राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी रेंज आईजी और एसपी को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मॉड्यूल का उद्देश्य कुछ युवाओं को भर्ती कर उन्हें आगे चलकर संवेदनशील और हिंसक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करना था। पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने कथित तौर पर यह भी बताया कि संभावित टारगेट्स की तस्वीरें व्हाट्सएप जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए भेजी जाती थीं।
एजेंसियों को मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों में विदेशी धार्मिक भाषण, वीडियो और कट्टरपंथी सामग्री मिलने का दावा किया गया है। इन सभी डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके।
जांच अधिकारियों के अनुसार, फराज़ ने पूछताछ में कथित रूप से यह स्वीकार किया कि उसने पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के निर्देश पर पासपोर्ट बनवाया था। इस बयान के बाद एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क वैध दस्तावेजों के जरिए अवैध अंतरराष्ट्रीय आवाजाही की योजना पर काम कर रहा था।
एजेंसियों का मानना है कि मदरसा शिक्षक मौलाना इज़हार-उल-हक लगातार विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में था और बिहार के अलग-अलग जिलों में नेटवर्क को फैलाने में उसकी भूमिका हो सकती है। वह उन लोगों को जोड़ने का काम कर रहा था जो पहले किसी संगठन या नेटवर्क से जुड़े नहीं थे।
इस मामले की शुरुआत 12 जून को हुई जब मध्य प्रदेश ATS ने भोपाल के काजी कैंप इलाके में एक गुप्त ऑपरेशन के दौरान फराज़ को गिरफ्तार किया था। उसकी पूछताछ से मिले इनपुट के आधार पर बिहार और अन्य राज्यों में जांच आगे बढ़ी।
सुरक्षा एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की फंडिंग, संपर्क और डिजिटल कम्युनिकेशन मैपिंग में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं हो सकता और इसके कई राज्यों में लिंक होने की आशंका है।
फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और एजेंसियों का कहना है कि डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
