भुवनेश्वर। ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित लोक निर्माण विभाग के रोड एंड बिल्डिंग (R&B) डिवीजन-1 में सामने आए ₹9.24 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले की जांच में विजिलेंस ने कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को चार और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें कार्यालय के चपरासी दीपक कुमार राउत्रे और लक्ष्मण बिस्वाल तथा आउटसोर्सिंग पर तैनात दो डाटा एंट्री ऑपरेटर राजीब लोचन सेनापति और सौम्य रंजन महापात्र शामिल हैं। इन गिरफ्तारियों के साथ मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या छह हो गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए चारों कर्मचारी पहले गिरफ्तार किए जा चुके सेक्शन ऑफिसर बनलता मोहंती और जूनियर असिस्टेंट बिबुदत्त नायक के अधीन काम करते थे। आरोप है कि सरकारी धन को कथित तौर पर निकालने, अलग-अलग खातों में पहुंचाने और लेनदेन को छिपाने में इनकी भूमिका रही। जांच में सामने आए बैंक लेनदेन के आधार पर विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घोटाले की रकम किस तरह विभिन्न खातों में पहुंचाई गई और बाद में उसका इस्तेमाल या वितरण कैसे हुआ।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच कथित तौर पर सरकारी धन की हेराफेरी की गई। जांच में आरोप है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए गए। इसके अलावा कार्यालय के आकस्मिक खर्चों के नाम पर भी कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और कार्यादेश बनाए गए। इन बिलों को इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के जरिए भुगतान के लिए मंजूर कराया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि भुगतान वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों में भेजे गए। प्रारंभिक पड़ताल में ऐसे 77 बैंक खातों का पता चला है, जो 48 लोगों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें आरोपियों के परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और करीबी लोगों के खाते शामिल होने की बात सामने आई है। विजिलेंस इन खातों में हुए लेनदेन की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सरकारी खाते से निकली रकम किन लोगों तक पहुंची।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
रविवार को गिरफ्तार किए गए चार कर्मचारियों के व्यक्तिगत बैंक खातों में भी कथित तौर पर घोटाले की रकम पहुंची। जांच के अनुसार, दीपक कुमार राउत्रे के खाते में ₹32,47,800, लक्ष्मण बिस्वाल के खाते में ₹16,21,484, राजीब लोचन सेनापति के खाते में ₹28,28,817 और सौम्य रंजन महापात्र के खाते में ₹35,69,098 जमा हुए। इन रकमों के स्रोत और उनके आगे के इस्तेमाल की जांच की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर रकम प्राप्त करने वाले कुछ खाताधारकों ने नकद निकासी की या कमीशन के रूप में हिस्सा अपने पास रखा। इसके बाद बची रकम कथित रूप से मुख्य आरोपियों तक वापस पहुंचाई जाती थी। हालांकि, इन लेनदेन की पूरी कड़ी और प्रत्येक आरोपी की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
घोटाले का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर बैंक खातों में मौजूद रकम को फ्रीज करने और उसे बरामद करने की कार्रवाई भी की गई। अब तक करीब ₹3.96 करोड़ की राशि फ्रीज और बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। विजिलेंस बाकी रकम की तलाश के साथ-साथ कथित फर्जी बिलों, कार्यादेशों और भुगतान रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
सभी छह आरोपियों को अदालत में पेश किया जा चुका है। भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी मामले की जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत आगे बढ़ा रही है। जांच का दायरा अब बैंक खातों, डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड, IFMS में दर्ज प्रविष्टियों और कथित फर्जी दस्तावेजों तक बढ़ाया गया है। अधिकारियों के सामने यह भी चुनौती है कि सरकारी भुगतान व्यवस्था में कथित तौर पर इतनी बड़ी रकम निकालने के लिए किन स्तरों पर मिलीभगत हुई और निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई।
