भावनगर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी ने सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए किया था संपर्क; फर्जी दस्तावेज भेजकर फरार होने का आरोप, पुलिस वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में जुटी

इंस्टाग्राम विज्ञापन से डीजल पंप लाइसेंस दिलाने का झांसा, ₹7.50 लाख की ठगी: दो भाइयों पर केस दर्ज

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By Roopa
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भावनगर: गुजरात के भावनगर में इंस्टाग्राम पर डीजल पंप और पेट्रोकेमिकल स्टोरेज लाइसेंस दिलाने का विज्ञापन देखकर संपर्क करना एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी को भारी पड़ गया। आरोप है कि लाइसेंस दिलाने का झांसा देकर दो भाइयों ने कारोबारी से ₹7.50 लाख ठग लिए और फर्जी दस्तावेज भेजने के बाद फरार हो गए। मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, भावनगर के सुभाषनगर निवासी और समर्पण लॉजिस्टिक्स नाम से परिवहन व्यवसाय संचालित करने वाले पल्लव अशोकभाई धोलकिया तथा उनके कारोबारी साझेदार रजनीभाई चाड ने इंस्टाग्राम पर फाल्कन ग्रुप ऑफ कंपनीज के नाम से प्रकाशित एक विज्ञापन देखा था। विज्ञापन में उपभोक्ता डीजल पंप और पेट्रोकेमिकल स्टोरेज लाइसेंस उपलब्ध कराने का दावा किया गया था। इसे वास्तविक मानकर दोनों ने विज्ञापन में दिए गए संपर्क पर बात की।

जांच के अनुसार, सूरत निवासी प्रशांत धनजीभाई जालोधरा ने स्वयं को कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर बताते हुए दावा किया कि वह आवश्यक लाइसेंस दिलवा सकता है। बातचीत के दौरान पूरे प्रोजेक्ट की लागत ₹15 लाख तय की गई और साणेस क्षेत्र में परियोजना के लिए जमीन भी कथित तौर पर चयनित की गई।

पुलिस का कहना है कि प्रशांत के भाई जतिन जालोधरा ने भी बातचीत में हिस्सा लिया और शिकायतकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा तथा निर्धारित समय के भीतर लाइसेंस जारी करा दिए जाएंगे। इन आश्वासनों के बाद शिकायतकर्ताओं ने सौदे को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

शिकायत के मुताबिक, दोनों कारोबारियों ने नकद और आरटीजीएस के माध्यम से कुल ₹7.50 लाख का भुगतान किया। रकम मिलने के बाद आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए नोटरीकृत दस्तावेज और लाइसेंस से जुड़े कागजात भेजे तथा दावा किया कि पूरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि बाद में दस्तावेजों में कई विसंगतियां मिलने पर शिकायतकर्ताओं को उन पर संदेह हुआ।

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निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी लाइसेंस जारी नहीं हुआ तो शिकायतकर्ताओं ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों के मोबाइल फोन बंद मिले। इसके बाद वे सूरत स्थित उनके पते पर पहुंचे, जहां न तो आरोपी मिले और न ही लाइसेंस या भुगतान की गई राशि के संबंध में कोई संतोषजनक जानकारी मिल सकी।

शिकायत के अनुसार, आरोपियों के परिजनों ने बताया कि दोनों भाई कथित तौर पर इसी तरह कई अन्य लोगों के साथ भी धोखाधड़ी कर चुके हैं और फिलहाल वहां मौजूद नहीं हैं। इसके बाद शिकायतकर्ताओं ने वेलावदर भाल पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल संचार और आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या आरोपियों ने फर्जी कंपनी के दस्तावेज और नकली नोटरी कागजात का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ताओं का विश्वास जीता था।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर ठग अब सोशल मीडिया विज्ञापनों के माध्यम से कारोबारियों और निवेशकों को आकर्षक व्यावसायिक अवसरों का झांसा देकर निशाना बना रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी कंपनी की वैधता, सरकारी स्वीकृतियों और लाइसेंस प्रक्रिया का आधिकारिक माध्यमों से स्वतंत्र सत्यापन किए बिना धनराशि का भुगतान नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, केवल सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला विज्ञापन किसी संस्था की प्रामाणिकता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों की तलाश जारी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसी तरीके से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया था। बैंक खातों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण कर पूरे कथित धोखाधड़ी नेटवर्क और उससे जुड़े संभावित सहयोगियों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।

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